यह बॉर्डर नहीं है बल्कि किसानों के आंदोलन के आंदोलन को रोकने के लिए तार को ऐसे लगाया गया है जैसे ………..

देश में आज किसान आंदोलन कर रहे हैं और वही पुलिस ने भी इन्हें रोकने के लिए भरपूर इंतजाम किए गए हैं हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया है इन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया है और और भी कई तरीके के इस्तेमाल किए गए हैं । वही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई सरहद हो और के ऊपर तार लगाकर रोकने की कोशिश की जा रही हो। उस वीडियो को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है।

आपने ऊपर ट्वीट में वह वीडियो तो देखा ही होगा कि कैसे पुलिस बल पीछे खड़ा हुआ है और आगे सड़क पर सीमेंट के बड़े-बड़े पिलर खड़े हुए हैं उनको सटाकर एक सीमा बनाई गई है उसके ऊपर तार को ऐसे लगाया गया है जैसे किसी देश की कोई सरहद होती हो और जो प्रदर्शनकारी हैं वह कहीं से आते हो उनके रोकने के लिए यह इंतजाम किए गए हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई लोगों ने टिप्पणियां की हैं।

इस तरीके के इंतजाम को देखकर कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी कि ऐसा लगता है कि जैसे दिल्ली हरियाणा बॉर्डर को भारत-पाकिस्तान बॉर्डर बनाने की तैयारी हो रही है। इससे पहले भी किसानों के प्रदर्शन हुए हैं लेकिन कभी भी इस तरीके के इंतजाम नहीं किए गए हालांकि किसानों को रोकने के लिए भरपूर प्रयास किए गए और उन किसानों की समस्याओं को सुना भी और उनकी समस्याओं को मीडिया के सहारे देश की जनता भी सुनती थी।

वक्त बदल गया है और हमारे देश का मीडिया गोदी मीडिया हो गया है। और जब इससे पहले जब किसानों के आंदोलन हुए थे तब भी पुलिस ने रोकने के भरपूर प्रयास किए थे लेकिन इस तरीके का प्रयास तो पहले कभी नहीं देखा कि किसानों को रोकने के लिए बिल्कुल बॉर्डर बना दिया गया हो। हालांकि किसान जो कि अन्य जाता है वह भी हमारे देश का ही है। पर अगर अन्नदाता की समस्याओं को यह मौजूदा सरकार नहीं सुनेगी तो आखिरकार कौन सुनेगा।

अगर देखा जाए तो देश के किसानों के साथ क्या हुआ है लगातार ऐसी हमारे सामने खबरें आती रहती हैं। अखबारों में ऐसी ढेरों खबरें भरी पड़ी हैं। जिसमें कर्ज से परेशान होकर किसान जा न तक दे देते हैं। देश में लगातार महंगाई बढ़ रही है और महंगाई के साथ-साथ किसानों के बीच उनकी दवाइयां और उर्वरक लगातार उन पर मूल्य बढ़ रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी सोचने वाली बात यह है कि किसानों की फसलों के मूल्य बढ़ने की बजाय गिर रहे हैं।

और कभी कभी तो ऐसा होता है कि अगर मौसम खराब हो जाए और फसल के लिए नुकसान हो जाए तो जो लागत होती है उसका भी पैसा निकालना किसान के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है। किसान का एक मुख्य व्यवसाय खेती ही होता है अगर उसमें भी उसे पर्याप्त सुविधाएं ना मिले क्योंकि जब देश में चुनाव होते हैं तो किसानों का बड़ा जिक्र होता है। नेताओं के भी ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं जो चुनाव के वक्त किसानों के बड़ा प्रिय बन जाते है ।

और जब किसान अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं तो उन्हें रोकने के लिए ऐसे इंतजाम किए गए हैं कि एक बॉर्डर बनाया गया है उसके ऊपर तार लगाया गया है ऐसा लग रहा है कि किसी दो देशों के बीच एक सरहद बनाई गई हो। आखिरकार देश के अन्नदाता के साथ ऐसा व्यवहार क्यों।