टाइम मैगजीन के 100 प्रभावशाली लोगों की लिस्ट में शाहीन बाग की दादी का नाम आने से गोदी मीडिया में मायूसी क्यों

शाहीन बाग एक ऐसा प्रदर्शन था । जो कि लोग इसमें काले कानून यानी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते थे। यह नागरिकता संशोधन कानून समाज धर्म के आधार पर बांटने वाला कानून था। लेकिन इस शाहीन बाग प्रदर्शन को गोदी मीडिया के एंकरों ने हमेशा इसको गलत नजर से देखा। गोदी मीडिया के कार्यक्रमों में अक्सर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बता दिया जाता था। जब वहां 2000 के नोट में चिप की खोज करने वाले एंकर पहुंचे।

तो उन्होंने इससे मिनी कश्मीर तक बता दिया था। मगर इस बात का यूट्यूब गवाह है शाहीन बाग के नाम से न्यूज़ पर सर्च कीजिए और गोदी मीडिया के चैनल पर किसी एक वीडियो को देखिए। आपको सब कुछ समझ में आ जाएगा। शाहीन बाग के जरिए इन एंकरों ने पूरे मुस्लिम समाज को टारगेट किया। और सोशल मीडिया पर शाहीन बाग प्रदर्शन के लिए जो जो भाषा का इस्तेमाल किया गया था। उसके बारे में कुछ कहा भी नहीं जा सकता।

दादी का नाम से गोदी मीडिया में मायूसी कैसी

शाहीन बाग में महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन करती थी। लेकिन गोदी मीडिया के एंकर महिलाओं पर बोलने से भी नहीं चूके। लेकिन गोदी मीडिया की एक फितरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जब भी कहीं नाम छपा है तब तक खुद ही मीडिया ने लगभग 24 घंटे जमकर प्रशंसा की । और लगातार कार्यक्रम किए गए। और इसी के साथ-साथ देश में आगे होने वाले भविष्यवाणी पर भी चर्चा की।

टाइम मैगजीन ने पूरी दुनिया के 100 प्रतिभाशाली लोगों की लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई , आयुष्मान खुराना , और शाहीन बाग मैं प्रदर्शन करने वाली बिलकिस बानो का भी नाम है । लेकिन गोदी मीडिया के एंकरों में बिलकिस बानो का नाम आने से मायूसी छा गई। सोचना पड़ गया कि टाइम मैगजीन में तो बिलकिस बानो दादी का भी नाम आ गया। अब समस्या यहां आई कि

अगर टाइम की मैगजीन पर अगर जिक्र किया जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उसमें दादी का भी नाम आ रहा है। जिस प्रदर्शन में दादी ने हिस्सा लिया था वह प्रदर्शन लगभग 3 महीने से ज्यादा चला लेकिन कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण की वजह से इस प्रदर्शन को बंद करना पड़ा। अगर यह प्रदर्शन बंद नहीं होता तो गोदी मीडिया के एंकर तबलीगी जमात से ज्यादा इस शाहीन बाग को टारगेट करते। और इसी की वजह से शाहीन बाग प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया था।

शाहीन बाग में अपने हक के लिए आवाज उठाने वाली महिलाओं को इन गोदी मीडिया के एंकरों ने हमेशा टारगेट किया। और इन महिलाओं के प्रदर्शन को टीवी पर कश्मीर से जोड़ कर दिखाया। और उसी टीवी के कार्यक्रम में शाहीन बाग प्रदर्शन को लेकर में बुनियादी बातों का जिक्र किया। लेकिन हकीकत तो यह थी कि यह काले कानून जो कि धर्म के आधार पर था इसको लेकर यह महिलाएं आवाज उठा रही थी।

दादी भी भारतीय हैं। लेकिन 82 साल की दादी बिलकिस बानो का नाम आने से गोदी मीडिया के एंकर में मायूसी छा गई। लेकिन हां एक बात तो स्पष्ट है अगर उस लिस्ट शाहीन बाग की दादी का नाम नहीं आता और केवल उस लिस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आता तब आप गोदी मीडिया के एंकरों के कार्यक्रम ही अलग नजर आते। और कुछ अलग ही अंदाज की खुशी जाहिर की जाती और वाहवाही से हदें पार की जाती