नागरिकता के कागज मांगने वाली सरकार के पास लॉकडाउन के समय प्रवासी मजदूरों की मृत्यु का कोई आंकड़ा नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैली में कहा था कि देश सुरक्षित हाथों में है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावों की इस कोरोनावायरस में पोल खुल गई। प्रदेशों की स्वास्थ्य व्यवस्था भी सामने निकल कर आई। और यही नहीं मीडिया ने जो सच्चाई लोगों से छिपा रखी थी वह भी सामने निकल कर आई। सबसे पहली बात देश में लॉकडाउन को पहले लगाना चाहिए था लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार गिराने की वजह से लॉकडाउन को बढ़ाया गया।

लेकिन लॉकडाउन को पूरे देश में लागू तो किया गया लेकिन यह लॉकडाउन बिना तैयारी के सरकार ने लागू किया। इस लॉकडाउन को लगाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार देश को संबोधित किया। और इसी लॉकडाउन के बीच थाली ,ताली ,मोमबत्ती , दीया सभी का प्रयोग किया गया । लेकिन इसके बीच प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटते रहे रेलवे स्टेशन पर कई बार भीड़ भी लगी। लेकिन मजदूर पैदल ही अपने घर लौटते रहे।

कुछ मजदूरों ने सोचा कि हो सकता है यह लॉकडाउन जल्दी ही खुल जाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि किस दिन में कोरोनावायरस खत्म हो जाएगा लेकिन जब लॉकडाउन को आगे बढ़ाया गया तब वे लोग भी पैदल अपने घरों को निकल पड़े। लेकिन प्रवासी मजदूरों की पैदल चलते वक्त कितने लोगों की मृत्यु हुई सरकार के पास इसका कोई डाटा नहीं है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि जैसे ही लॉकडाउन को खोला गया वैसे ही गृह मंत्री अमित शाह बिहार में डिजिटल रैली करने लगे।

लेकिन सवाल यह है की नागरिकता के कागज मांगने वाली सरकार पर प्रवासी मजदूरों का तो कोई डाटा ही नहीं है। तो कैसे मान ले कि देश सुरक्षित हाथों में है। दूसरी बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन के समय अपने भाषण में कहा था कि कोरोनावायरस 21 दिन में खत्म हो जाएगा लेकिन हालात यह हैं कि भारत में इस वक्त कोरोनावायरस संक्रमित मरीज दुनिया में सबसे ज्यादा आ रहे हैं और भारत दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।