पढ़िए : ये क्या पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों पर अखबारों में विज्ञापन को लेकर कहीं थी बड़ी बात लेकिन अब खुद

आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने ट्वीट सवाल खड़े करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। लेकिन उससे पहले जब भी विपक्ष में थे तब वे सरकार से सवाल पूछते थे और जनता उनका समर्थन भी करती थी और यही नहीं मीडिया भी उस वक्त सरकार से सवाल करती थी। और उस समय सरकार को विवश होना पड़ता था। और जनता के हित की बात होती थी। लेकिन उस समय सरकार से सवाल करना देशद्रोह नहीं था।

लेकिन 2014 के बाद सारे नियम बदल गए। प्रधानमंत्री का इंटरव्यू भी हुआ तो फिर बचपन की बातें पूछी। अक्सर ट्विटर पर एक नरेंद्र मोदी डॉट इन हैंडल है जिस पर जाकर आप 2013 के सरकार से सरकार से पूछे गए सवालों को आप देख सकते है । और फिर उन सवालों की तुलना आज के समय से कीजिए और फिर दोनों का मिलान करके थोड़ा समझने की कोशिश कीजिए आपको फर्क साफ नजर आ जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो आधार कार्ड का भी विरोध किया था लेकिन उसके बाद सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधार कार्ड का इस्तेमाल कराने को कहा। और फिर आधार कार्ड लिंक प्रक्रिया भी शुरू हुई। लेकिन सवाल यह है कि पहले कुछ और अब कुछ और। ऐसा क्यों है देश जानना चाहता है । लेकिन अब तो मीडिया द्वारा भी किसानों के बिल को समझाने की कोशिश हो रही है और प्रशंसा भी की जा रही है कि यह किसानों के लिए ऐतिहासिक बिल है

2013 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखबारों में किसानों के विज्ञापन को लेकर एक बड़ी बात कही थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कागजों पर विज्ञापन डालने के बजाय अच्छा होगा कि किसानों के लिए फसल बीमा दिया जाए और इसके लिए दिल्ली सरकार से बात की जाए लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अब खुद अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर अपना विज्ञापन छपवा रहे हैं। आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है देश जानना चाहता है।