किसान भारत का ही होता है , लेकिन गोदी मीडिया फूट डालने के लिए इन्हें पंजाब का किसान कहकर खालिस्तानी बताने लगा , पढ़े

आपने देखा होगा कि पहले कोई भी किसान होता था तो उसे भारत का होता था और भारतीय किसान कहा जाता था लेकिन अब जमाना बदल गया है और जो गोदी मीडिया है। अब उसने इन भारतीय किसानों को पंजाब का किसान बताना शुरू कर दिया है और पंजाब का किसान बताने के साथ साथ इन्हें खालिस्तानी भी बताना शुरू कर दिया है। क्योंकि कहीं ना कहीं सरकार गोदी मीडिया के सहारे इन किसानों की आवाज को दबाना चाहता है।


लेकिन गोदी मीडिया का अब यह भी किस्सा सुनाइए 17 सितंबर को देश के बेरोजगारों ने सड़कों पर आकर थाली व ताली बजा कर प्रदर्शन किया था लेकिन इसी गोदी मीडिया ने उन युवाओं के प्रदर्शन को पूरी तरीके से छिपा दिया था उन युवाओं पर कवरेज करने को लेकर बिल्कुल गायब कर दिया था। भारत के युवा सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर अपलोड करने लगे लाखों ट्वीट आज भी ट्विटर पर मौजूद हैं। आप चाहे तो उन वीडियो को भी देख सकते हो  सोशल मीडिया पर तो युवा छात्रों की वीडियो वायरल हो रही थी लेकिन अफ़सोस गोदी मीडिया उन छात्रों पर कबरेज नहीं कर सका

गोदी मीडिया के कान पर जूं भी नहीं रेंगी। और इन युवाओं के प्रदर्शन को बिल्कुल गायब ही कर दिया गया। ऐसे कई प्रदर्शन हुए हैं जिसे गोदी मीडिया के इन एंकर ने बदनाम किया है। और पहली बात उस पर कवरेज नहीं की और कवरेज की तो उसे कहीं ना कहीं। और अगर कवरेज किया अभी तो उसे देश विरोधी बताने की कोशिश भी अपने कार्यक्रमों में की। और इसी मीडिया ने किसानों की मजबूरी नहीं देखी किसानों के साथ जो हुआ वह नहीं।

अब तो कोरोनावायरस को भी खेल समझा जा रहा है टेस्टिंग भी इतनी नहीं हो पा रही है। किसान अगर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं तो मीडिया भी यही बात बताने की कोशिश कर रहा है कि इनसे कोरोनावायरस फैल जाएगा लेकिन जो रैलियां हो रही है क्या उनसे कोरोनावायरस नहीं चलेगा और गोदी मीडिया इन्हें पंजाबी किसान बताने की कोशिश कर रहा है और पंजाबी किसान बताने के साथ साथ इन्हें खालिस्तानी बताने की भी कोशिश कर रहा है और गोदी मीडिया कहीं ना कहीं फूट डालने की कोशिश कर रहा है