इन्हें खेती की चिंता हो रही है लेकिन सड़कों पर आंदोलन कर रहे किसानों की नहीं , देखें

सड़क पर बैठे हुए आंदोलन कर रहे किसानों की इन्हें चिंता नहीं हो रही है लेकिन चिंता इस बात की हो रही है कि किसान जो आंदोलन कर रहे हैं तो किसान तो यहां आंदोलन में बैठे हुए हैं तो उनके खेतों में काम कौन कर रहा है इन्हें इनके खेतों की चिंता हो रही है लेकिन किसान सड़कों पर बैठे हुए उनकी चिंता नहीं हो रही है जिस प्रकार की इनके चैनलों पर किसानों को टारगेट करने वाली खबरें चलाई गई थी उन्हें खालिस्तानी तक बताया गया था।

लेकिन अब इन्हें इस बात की चिंता हो रही है कि किसान तो आंदोलन कर रहे हैं तो उनके खेतों में काम कौन कर रहा है तो वह इस बात के लिए ग्राउंड रिपोर्ट की जाए कि आखिरकार इनके खेतों में काम बहुत कर रहा है। और यह ऐसे लोग हैं जो सरकार को बचाने के लिए ना जाने किसानों के खिलाफ कौन-कौन सी अपने-अपने प्राइम टाइम में दिखा रहे है। और यह गोदी मीडिया के समूह में एक अहम रोल है। किसान तो अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

लेकिन कहीं ना कहीं यह शख्स यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि किसान तो यहां आंदोलन कर रहे हैं तो इनके खेतों में काम कौन कर रहा है तो इसके पीछे किसी विदेशी ताकत का हाथ है हालांकि एक कृषि मंत्री पहले ही बयान दे चुके हैं कि इसके पीछे चीन पाकिस्तान का हाथ है। और इसी तरीके से यह किसानों के आंदोलन को बदनाम करने पर तुले हुए हैं। और इसके द्वारा लगातार किसानों के आंदोलन के खिलाफ ऊटी खबरों का प्रचार प्रसार हो रहा है।

हालांकि किसानों ने तो साफ कह दिया है कि हमें अपने किसानों के आंदोलनों को राजनीतिक आंदोलन नहीं बनाना है वह सिर्फ अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। और पूरे देश के किसान इकट्ठे भी हो रहे हैं। और भी गोदी मीडिया में कई चेहरे हैं जो लगातार इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। और जब यह लोग झूठी खबरें चला रहे हैं तो किसान इनके रिपोर्टरों को ढेर कर उनसे सवाल भी पूछ रहे हैं।