हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल बोले , चीन-पाकिस्तान का हाथ है इस किसान आंदोलन के पीछे

किसान अपना हक मांगने के लिए कृषि बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन जिस तरह मीडिया ने उनके खिलाफ उन्हें बदनाम करने के लिए रवैया अपनाया और जिस तरीके से पहले उन्हें खालिस्तानी बताया गया और जब बात यहां नहीं रुकी तब यहां एक हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने उन्हें डायरेक्ट यह कह दिया कि जो किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं इसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है।

लेकिन किसान आंदोलन जो कर रहे हैं इन किसानों को बदनाम करने के लिए मीडिया ने क्या नहीं किया इन्हें खालिस्तानी बताया इन्हें देशद्रोही बताया और जब यहां बात नहीं थमी तो फिर इन्हें शाहीन बाग पार्ट 2 तक बता दिया। लेकिन ये काम वह कर रहा है जिस पर किसानों की आवाज सरकार तक सुनाने की और पूरे देश को सुनाने की जिम्मेदारी है यानी कि हमारा देश का मीडिया इस वक्त सरकार का कुछ पिछलग्गू  बना हुआ है।

आखिरकार यह जो मंत्री कह रहे हैं कि किसान आंदोलन के पीछे चीन पाकिस्तान का हाथ है इनके पास क्या ऐसे प्रमाण हैं जिन्होंने यह बयान दे दिया कि इस आंदोलन के पीछे चीन पाकिस्तान का हाथ है। क्यों क्या इस आंदोलन को चीन के  शी जिनपिंग हवा दे रहे हैं या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस आंदोलन को हवा दे रहे हैं। आखिरकार इन मंत्री को ऐसा कौन सा प्रमाण मिल गया। जिस पर प्रमाण से उन्होंने यह कह दिया कि इस आंदोलन के पीछे चीन पाकिस्तान का हाथ है।

यह कोई नया नहीं है शाहीन बाग में आंदोलन हुआ था। तब भी ऐसी बिना प्रमाण के मीडिया पर खबरें चलाई जा रही थी दावा किया जा रहा था। इस आंदोलन में विदेशी का हाथ है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि आंदोलनों को विदेशी चीन पाकिस्तान का हाथ क्यों बताया जाता है क्योंकि जो आंदोलन चल रहा है उसे किसी तरीके से बदनाम किया जा सके और आंदोलन को रोका जा सके और यही काम अब लगातार नेता और मीडिया कर रहे हैं।

जबकि किसानों ने यह साफ कर दिया है कि हमें इस आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन नहीं बनाना है हालांकि इससे पहले अन्ना आंदोलन हुआ था और उसने जो आंदोलन में जो शामिल हुए थे वह लोग ना जाने कहां से कहां पहुंच गए कोई बड़ा नेता बन गया और कोई बड़ा व्यापारी अन्ना आंदोलन से देश को मूर्ख बनाया गया था और जिसने अन्ना आंदोलन किया था काश तक कोई पता नहीं है कि वह किस हाल में है। लेकिन किसानों ने यह साफ कर दिया है कि हमें किसी भी हाल में इस आंदोलन को राजनीतिक नहीं बनाना है।

हालांकि इस आंदोलन में कई नेताओं ने दस्तक देना चाहिए लेकिन किसानों ने इस पर साफ इनकार कर दिया कि हमें इस आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन नहीं बनाना है हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं सोशल मीडिया पर आपने वह तस्वीर देखी होंगे किसान किस तरीके से इस आंदोलन का हिस्सा बनने आए हैं। सर्दी के मौसम में कड़ाके की सर्दी में ठंडी सड़कों पर किसान अपना हक मांगने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। क्या इन राजनेताओं ने इनके आंदोलन की तस्वीरों को गौर से देखा।

जब किसानों ने यह साफ कर दिया है कि हमें इस आंदोलन को राजनीतिक नहीं बनाना है और इसके बाद शाहीन बाग की दादी भी जब इस आंदोलन में पहुंची तो उन्हें भी वापस करा दिया गया क्योंकि अगर शाहीन बाग की दादी वहां उस आंदोलन में अगर शामिल हो जाती तो मीडिया और नेताओं को इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए 1 मिनट भी नहीं लगता ना जाने मीडिया पर कौन-कौन सी खबरें प्रसारित हो जाती इसीलिए शाहीन बाग की दादी को वहां से वापस कर दिया गया।

कई हरियाणवी गायक किसानों के आंदोलन का समर्थन करते दिखाई दिए आज देश का हर नागरिक किसानों के समर्थन में है लेकिन मीडिया इन सब बातों पर एक पर्दा डाले हुए हैं हकीकत तो यह है कि सरकार की सबसे बड़ी मजबूती है वह मीडिया है और इसी मीडिया से देश की जनता को मूर्ख बनाया जा सकता है इस मीडिया से देश की जनता को झूठ फैलाया जाता जा सकता है। और यही मीडिया प्रचार के काम भी आती है। आज का मीडिया अब प्रचारक मीडिया बन गया है।

लेकिन जिस तरीके से इस किसान आंदोलन में कई बड़े लोग शामिल होते जा रहे हैं। पहले तो मीडिया ने कवरेज करना ही छोड़ दिया और जब कवरेज किया तो उनके खिलाफ अनाप-शनाप खबरें चलाना शुरु कर दिया फिर क्या हुआ जो किसान महा आंदोलन कर रहे थे उन्होंने इन गोदी मीडिया के रिपोर्टरों को घेरना शुरू कर दिया और इनसे सवाल करना शुरू कर दिया या फिर जो आपने खबर चलाई थी क्या हम वह वैसा कर रहे थे। और जो मीडिया के रिपोर्टर थे उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।

लेकिन जिस तरीके से किसानों के आंदोलन को बदनाम करने के लिए मीडिया ने पूरी ताकत लगा ली लेकिन अब जब पूरी तरीके से बात नहीं बनी तो हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल अब यह कहने लगे कीजिए यह जो किसानों का आंदोलन चल रहा है इसके पीछे चीन पाकिस्तान का हाथ है। जबकि हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल के पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इस आंदोलन के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है।