किसानों ने सरकार का प्रस्ताव क्यों ठुकराया,MP पहुंचा महाराष्ट्र के किसानों का जत्था कल कहा पहुचने की उम्मीद आइये जाने

हाय फ्रेंड मैं आप लोगों से आशा करता हूं कि आप लोग खुशी ही होंगे मैं रोजाना अच्छे-अच्छे न्यूज़ आर्टिकल लिखता हूं आज मैं आपको इस न्यूज़ आर्टिकल में बताऊंगा किसानों ने सरकार का प्रस्ताव क्यों ठुकराया,MP पहुंचा महाराष्ट्र के किसानों का जत्था कल कहा पहुचने की उम्मीद आइये जाने.

आप सभी से मेरा विनम्र अनुरोध है कि आप सभी लोग न्यूज़ आर्टिकल को पूरा पढ़ें जब आर्टिकल को पूरा पड़ेंगे तभी पूरी बात आप लोगों की समझ में आएगी अन्यथा आप कहेंगे कि आर्टिकल हमें अच्छा नहीं लगा.

हमारे प्रिय मजबूर किसान भाइयों का आज आंदोलन का 28 दिन है 28 दिनों के बीच आंदोलन में मौतें भी हो गई लेकिन बेरहमी सरकार ने अभी किसान भाइयों की कोई भी एक बात नहीं मानी है सरकार अपनी मर्जी पर टिकी हुई है माने तो सरकार अपने इरादों पर एक दम अड़ी है.

लेकिन हमारे मजबूर किसान के लिए जो सरकार ने काले तीन कानून बनाए हैं उनको वापस लेने की मांग पर डटे हुए हैं भारतीय किसान यूनियन के युद्धवीर सिंह जी ने कहा कि जिस प्रकार से ही केंद्र सरकार बातचीत की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहा है इस प्रक्रिया से देखें तो साफ दिख रहा है कि सरकार जान बूझकर इस में देरी करना चाहती है.

सरकार इस मुद्दे को इतना बढ़ाना चाहती है कि उससे हमारे मजबूर किसानों का मनोबल जो है वह पूरी तरीके से टूट जाए यह सरकार मुद्दों को बहुत ज्यादा हल्के में भी ले रही है.

MP पहुंचा महाराष्ट्र के किसानों का जत्था कल दिल्ली पहुचने की उम्मीद आइये जाने वही बात करें आज इस जत्थे ने  मध्यप्रदेश में प्रवेश कर गया है वहीं किसानों का स्वागत भी किया गया है यह हमारे महाराष्ट्र के किसानों को जत्था आज राजस्थान कोटा पहुंचेगा कल यह जत्था दिल्ली रोड पहुंचने की उम्मीद है ये खा जा रहा है की इस जत्थे के अंदर 1000 किसान भाई लव 50 गाड़ियों के साथ में आए हुए.

आज बुधवार को सिंघु बॉर्डर: सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए किसान संगठनों की जो बैठक बुलाई गई थी. बैठक के बाद किसान संगठनों ने कहा कि हम तीनों कानूनों में किसी भी प्रकार के बदलाव की बात नहीं कर रहे बल्कि इन कानूनों को निरस्त करने की मांग करते हैं. उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर जो प्रस्ताव सरकार से आया है उसमें कुछ भी साफ नहीं और स्पष्ट नहीं है.

किसान संगठनों की ओर से कहा गया कि सरकार की ओर से आया प्रस्ताव इतना खोखला और हास्यास्पद है कि उस पर उत्तर देना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि हम तैयार हैं लेकिन सरकार ठोस प्रस्ताव लिखित में भेजे और खुले मन से बातचीत के लिए बुलाए.