वह भी एक जमाना था जब देश के अन्नदाता की तस्वीर नोट पर हुआ करती थी , लेकिन अब ……

एक वो भी जमाना था जब भारतीय रुपए पर देश के अन्नदाता की तस्वीर को जगह दी जाती थी। पहले कभी भारत में जब रुपया छापा गया तो उस पर भारतीय किसान की तस्वीर को गया। हालांकि सिक्के भी जब छपी तो उन पर भी फसलों की बालियों को दिखाया गया। धीरे-धीरे जमाना बदलता गया हम लोग आगे बढ़ते गए और किसान हमारी करेंसी से ही गायब होते गए। आज भी पुराने नोटों पर अगर देखा जाए तो किसान हल से खेत जोतते हुए दिखाई देंगे।

देश की पुरानी करेंसी को देखकर यह भी याद आता है कि कितनी को खुशहाली थी अच्छे दिनों की तलाश में नोटों को बदल कर भी देख लिया रंग-बिरंगे नोट भारत में लोगों के पास आ गए लेकिन इन्हीं रंग-बिरंगे नोट न जाने कितने लोगों की खुशियां ले गए। जब यह रंग-बिरंगे नोट आए तो इनका असर हमारी देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा पड़ा। लेकिन न्यूज़ चैनलों में इन रंगीन नोटों को कुछ ज्यादा ही फायदे बताए जा रहे थे बताया जा रहा था कि अब सब भ्रष्टाचार बंद हो जाएगा।

वह बात एक अलग है कुछ टीवी पर बैठे एंकरों  ने यह भी बताया था कि जो नए वाले नोट आएंगे इनमें चिप भी होगी। लेकिन जिस अन्नदाता की तस्वीर पहले के नोटों पर हुआ करती थी आज वही अन्नदाता ठंडी सड़कों पर बैठकर अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान जमा होकर इस बिल को रद्द कराने की मांग कर रहे हैं जो कि सरकार ने किसानों की बिना सहमति के इस कानून को बना दिया।

लेकिन किसान तो पहले भी आंदोलन करते थे और अपना हक मांगते थे और आंदोलन पहले भी हो चुके हैं पूरे देश में उसका समर्थन किया है। लेकिन वह भी एक जमाना था जब लोगों के हाथ में ₹5 का नोट आता था तो उस पर किसान दिखाई देता था जो कि अपने खेत को हल से जोत रहा होता है। लेकिन अब जमाना बदल गया है सरकार अब रंग-बिरंगे नोट भी ले आई लेकिन कहीं उस नोट पर किसान आप दिखाई नहीं देता है।