लॉक डाउन से दिहाड़ी मजदूरो पर संकट

भारत एक कोरोनावायरस संकट के दौर से गुजर रहा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च को राष्ट्र को संदेश दिया कि पूरे भारत में लॉक डाउन किया जाता है तब सभी लोग एक साथ लॉक डाउन का पालन कर रहे थे और लॉक डाउन ही नहीं पहले जनता कर्फ्यू लगा था उसका भी सभी लोगों ने मिलकर पालन किया उसके बाद लॉक डाउन हुआ और सभी लोगों ने इसका पालन किया। भारतीय संस्कृति के तहत कोरोनावायरस महामारी के चलते भारतीय एकता भी जाग चुकी थी लोग एक दूसरे को मदद को आगे आ रहे थे। सोशल मीडिया पर देश की एकता की मिसाल की ढेरों वीडियो वायरल हो रहे थे। लेकिन वहीं मुख्यधारा की मीडिया इस एकता को देखकर बिल्कुल खामोश पड़ा था देश में मजदूर पैदल अपने घर जा रहे थे लेकिन उन पर डिबेट नहीं की गई ।

लेकिन जैसे ही 30 मार्च को तबलीगी जमात का मामला सामने आता है यह सारी मीडिया एकदम खड़ी हो जाती है। और इस मीडिया को पूरा मौका मिल जाता है अपने चैनल पर हिंदू मुस्लिम करने का जो यह पिछले 6 सालों से कर रहे हैं । और फिर यह सारे मीडिया चैनल तबलीगी जमात के सहारे सारे मुस्लिम लोगों को टारगेट करने लगे । यो मजदूर पैदल अपने घरों को लौट रहे थे उनके बारे में मुख्यधारा की मीडिया चैनल पर कोई भी चर्चा नहीं हुई तबलीगी जमात का मामला सामने आ गया था और उसी पर चर्चाएं होती रही लेकिन किसी मजदूर गरीबों पर जो परेशान हाल से गुजर रहे थे उन पर किसी ने कोई चर्चा नहीं की।

मुख्यधारा की मीडिया ने तबलीगी जमात को लेकर पुरानी वीडियो किए थे प्रसारित और झूठी खबरें
तबलीगी जमात का जब मामला सामने आया था तो मुख्यधारा की मीडिया ने उस पुराने वीडियो प्रसारित किए गए थे जिसमें कई मुसलमान लोग बर्तन प्याले चाटते नजर आ रहे थे और कई ऐसे भी लोग थे जो पुराने वीडियो प्रसारित किए गए थे। और यह दिन वीडियो के सहारे किसी एक विशेष धर्म को तभी कि समाज के सहारे टारगेट कर रहे थे क्योंकि इन्हें पूरा मौका मिल गया था हिंदू-मुस्लिम करने का। ज़ी न्यूज़ ने एक खबर चलाई कि फिरोजाबाद में तबलीगी जमात के चार लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं जिन्हें लेने टीम पहुंची तो उन पर पथराव किया गया लेकिन जब फिरोजाबाद पुलिस को यह पता लगा तो फिरोजाबाद पुलिस ने इनके ट्वीट का खंडन किया पूजा बाद पुलिस ने अपनी ट्वीट कर कर बताया कि आप इस तरीके भ्रामिक खबरें ना फैलाएं और आप इस ट्वीट को डिलीट करें।

मजदूरों पर संकट

जब संपूर्ण देश में लॉक डाउन हुआ तो गरीब दिहाड़ी मजदूर के सामने रोजगार के रास्ते बंद हो गए उनके मालिक ने भी उनसे हाथ खड़े कर लिए और फिर उन्होंने घर लौटने का मन बना लिया ग्रुप बनाकर मजदूर घर पर पैदल ही लौटने लगे सड़कों पर पैदल चलते रहे सभी लोग अपने घरों में बंद थे मजदूरों के पास मोबाइल भी बंद थे अगर वह रास्ते में भटक जाए तो संपर्क कैसे करें लेकिन रास्तों में कुछ लोग मिले जिन्होंने मदद की और इस मदद को देखते हुए मजदूरों का हौसला बढ़ा कि अब हम घर पहुंच जाएंगे ज्यादा से ज्यादा लोग मदद के लिए आगे आए और बढ़ चढ़कर लोगों ने हिस्सा लिया जो लोग सड़क पर पैदल अपने घरों को लौट रहे थे उनको खाने-पीने का इंतजाम किया लेकिन वह मजदूर अभी रुक गए हैं जिनके पास खाने-पीने का बजट है इस इंतजार में रुक गए हैं कि 14 तारीख के बाद जब लॉक डाउन खोलेगा तो हम अपने घरों को लौट जाएंगे । लेकिन बिहारी मजदूरों को इस लॉक डाउन के संकट से सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लॉक डाउन की वजह से यह बिल्कुल बेरोजगार हो गए हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें फल और सब्जी बेचते हुए मजदूर से व्यक्तियों ने आइडेंटी कार्ड मांगा नाम पूछने के बाद उसकी पिटाई शुरू कर दी ।

अब सवाल ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 तारीख की शाम को क्या राष्ट्र को संदेश देंगे क्या उस संदेश में लोगों को जागरूक रहने की और जो मजदूर फंसे हुए हैं उन पर कोई चर्चा होगी या जिन डॉक्टर के पास मास्क नहीं है पीपीई नहीं है तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विषय पर चर्चा करेंगे या फिर मोमबत्ती, थाली ,ताली ,जैसा कोई टास्क दे देंगे