कोरोनावायरस संक्रमण बढ़ता गया , और मीडिया तबलीगी जमात पर चलाता रहा झूठी खबरें , मौलाना साद को ढूंढती ….. विस्तार से पढ़ें पूरी खबर

जब देश में कोरोना वायरस संक्रमण फैला तब लॉकडाउन को लगाया गया और लॉकडाउन लगाने के 10 दिन बाद ही दिल्ली में निजामुद्दीन में तबलीगी जमात का मामला सामने आ गया था। यह लोग लॉकडाउन से पहले कार्यक्रम कर रहे थे और कार्यक्रम के दौरान ही लॉकडाउन को लगा दिया गया जिससे यह लोग वहीं फंस गए। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि जो जहां है वहीं रहे। और उन्होंने वैसा ही किया यह वही रूके रहे।

लॉकडाउन के 10 दिन तक तो कोरोनावायरस पर खबरें की गई लेकिन जैसे ही दिल्ली में तबलीगी जमात का मामला सामने आया मीडिया में कार्यक्रम की बाढ़ आ गई। गोदी मीडिया के प्राइम टाइम खबरों में तबलीगी जमात के लिए सबसे ज्यादा जगह मिली कुछ पहले के वायरल वीडियो थे जिससे तबलीगी जमात के वर्तमान के समय से उन वीडियो का कोई लेना देना नहीं था।

और बाद में अल्ट न्यूज ने अपने खुलासे में बताया कि जितने भी गोदी मीडिया ने तबलीगी जमात को लेकर वीडियो दिखाए थे वह पहले के हैं और वर्तमान के समय से उनका कोई लेना-देना नहीं है। मीडिया ने तबलीगी जमात के बहाने पूरे मुस्लिम समुदाय को टारगेट किया। और मीडिया ने इतना टारगेट किया कि लोग बायकाट करने लगे थे। तो अब आप समझ सकते हैं कि हमारे समाज को कौन अलग कर रहा है। और गोदी मीडिया के ऐसे कार्यक्रमों से कौन सी राजनीतिक पार्टी को फायदा मिल रहा है ।

मौलाना साद का एक ऑडियो भी जारी हुआ था और गोदी मीडिया ने उसे बिना जांचे परखे अपनी खबरों में शामिल किया था बाद में जब उस ऑडियो की जांच हुई तब उस ऑडियो में पाया गया कि इस ऑडियो में छेड़छाड़ की गई थी। लेकिन गोदी मीडिया एंकरों ने उसकी ऑडियो को अपने कार्यक्रमों में बिल्कुल सच साबित कर दिया था। लेकिन देश में कोरोनावायरस लगातार बढ़ता गया लेकिन किसी ने उस मुद्दे पर सवाल नहीं किया कि कुछ दिन पहले गुजरात में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम हुआ था।

जब तबलीगी जमात पर गोदी मीडिया के एंकर हर रोज नया नया खुलासा लेकर आ रहे थे क्योंकि उस समय तबलीगी जमात का मामला गोदी मीडिया को जबरदस्त रेटिंग दे रहा था। न्यूज़ 18 के एक कार्यक्रम में एक एंकर ने यह तक कह दिया था कि तबलीगी जमात का कनेक्शन पाकिस्तान से है। लेकिन इस खबर का भी कोई प्रमाण नहीं था यह खबर सिर्फ डिबेट बनकर रह गई और लोगों ने इसका लुत्फ उठाया।

सत्ता पक्ष के नेताओं ने और मुख्यधारा के मीडिया के एंकरों ने लगातार तबलीगी जमात के सहारे पूरे मुस्लिम समुदाय को टारगेट किया। देश में कोरोनावायरस को लेकर सरकार को जगाने की उस वक्त जरूरत थी इस वक्त देश में कोरोनावायरस संक्रमण फैल रहा था लेकिन वह सारा वक्त जिसमें सरकार व्यवस्था करके कोरोनावायरस संक्रमण को रोक सकती थी। लेकिन गोदी मीडिया के एंकर रोने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कोई सवाल नहीं किया कोई कार्यक्रम नहीं किया।

जिस वक्त लोग सड़कों पर पैदल चल रहे थे उन्हें दिखाने के बजाय मुख्यधारा का मीडिया तबलीगी जमात पर रिपोर्टिंग कर रहे थे उस तबलीगी जमात पर नए-नए खुलासे कर रहे थे। जब की मुख्यधारा की मीडिया की खबरों के दावे बाद में सब झूठ निकले। और गरीब लोग सड़कों पर पैदल चलते रहे। और उन गरीब सड़कों पर चलते हुए लोगों की खबरों को मुख्यधारा के मीडिया में प्राइम टाइम में कोई जगह नहीं मिल पाई।

लेकिन स्थिति यह हो गई कि भारत में कोरोनावायरस लगातार बढ़ता गया और तबलीगी जमात जैसे कई मामले निकल कर आए। ज़ी न्यूज़ के कार्यालय में कई लोग कोरोनावायरस निकले लेकिन मीडिया चैनल ने उन्हें कोरोना वॉरियर्स बताया। उसके बाद बिहार के बीजेपी कार्यालय में कई लोग कोरोना पॉजिटिव निकले। लेकिन लॉकडाउन में मजदूर सड़कों पर पैदल चल रहे थे गोदी मीडिया के एंकरों ने तो उन पर डिबेट भी नहीं की।

लेकिन अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा की तबलीगी जमात को लेकर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने बड़ा प्रोपगेंडा चलाया था। और उन्हें बलि का बकरा बनाया गया। अब जब बंबई हाईकोर्ट ने यह कह दिया है तो क्या मुख्यधारा के मीडिया चैनलों के एंकरों पर कार्यवाही होनी चाहिए। जो लगातार समाज में नफरत फैला रहे थे। क्या वह मीडिया के एंकर माफी मांगेंगे।

आज भारत में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 30 लाख के पार चली गई है और यह संख्या लगातार तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही है। लेकिन मुख्यधारा की मीडिया ने सरकार से सवाल ना लॉकडाउन के समय किया था जब मजदूर सड़कों पर अपने परिवार के साथ पैदल चल रहे थे और ना अब कर रही है जबकि भारत में 30 लाख से ज्यादा कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 30 लाख से ज्यादा हो गई है।