यूपी: यह हालत हो गई है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की , पत्रकार ने जब दिखाया सच तो हो गई एफआईआर , विस्तार से पढ़ें पूरी खबर

मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है और अगर वर्तमान के स्थिति में उस चौथे पाए का अगर जिक्र किया जाए। तो वो स्तम्भ बहुत कमजोर हो गया है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ जिसे कभी लिखने की आजादी थी। और मीडिया सच दिखाता भी था और लिखता भी था लेकिन कभी सच दिखाने को लेकर किसी पत्रकार पर एफ आई आर नहीं हुई। लेकिन वह दौर पुराना था यह नया दौर है न्यू इंडिया है नए नए कार्य होते रहते हैं इस न्यू इंडिया में

मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। आज वही मीडिया कठपुतली की तरह राजनीतिक इशारों पर नाच रहा है। और जो मीडिया सत्ता का वाहवाही करने में लगा हुआ है। इस समय गोदी मीडिया की हिम्मत नहीं है कि सरकार से मौजूदा स्थिति को लेकर कोई सवाल कर ले। क्योंकि वह सवाल इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि वे सत्ता की वाहवाही में लगे हुए हैं। और उन्हें देश में कुछ अच्छा बुरा नहीं दिखता

लेकिन जो पत्रकार अगर सरकार से सवाल पूछ ले सरकार की व्यवस्था की पोल खोल दे। उसपर एफ आई आर दर्ज हो जाती है उस पर मुकदमे दर्ज हो जाते हैं। जिस तरीके से गोदी मीडिया आज सत्ता की वाहवाही में लगा हुआ है गोदी मीडिया यह भूल गया है कि उसका काम सरकार से सवाल करना भी है। कोरोनावायरस का संक्रमण लगातार देश में फैलता हुआ चला जा रहा है लेकिन अभी तक किसी मुख्यधारा की मीडिया चैनल ने सरकार से कोई सवाल नहीं किया।

ऊपर आपने एक तस्वीर देखी होगी जिसमें एक पत्रकार सड़क पर बीचो-बीच लेटा हुआ है । यह देवरिया कलेक्टर ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते की तस्वीर है ।उसके सीने पर माइक रखे हुए हैं। पर इसका कारण सिर्फ यही है कि इस पत्रकार ने देवरिया में जिला अस्पताल में एक बच्ची पोछा लगा रही थी और इस पत्रकार ने वीडियो बना लिया था इसके बाद इस पत्रकार पर एफ आई आर दर्ज हो जाती है। लेकिन कार्यवाही तो अस्पताल के प्रशासन पर होनी चाहिए। लेकिन अस्पताल प्रशासन पर कार्य कार्यवाही करने के बजाए पत्रकार अमिताभ रावत के खिलाफ एफ आई आर दर्ज हो जाती है।

इस पत्रकार पर इसलिए एफ आई आर हो गई क्योंकि इसलिए सरकार की वाहवाही नहीं कि उस सरकार की अव्यवस्था को सामने लाकर रख दिया इसलिए इस पत्रकार पर एफ आई आर दर्ज हो गई। आपको बता दें पत्रकार अमिताभ रावत के खिलाफ एफ आई आर दर्ज 27 जुलाई को हुई थी लेकिन उसके बाद सोशल मीडिया पर अब वायरल हुई है। सोशल मीडिया पर कई वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ रावत के लिए आवाज उठा रहे हैं। पत्रकार का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहा है ।

क्या इस तरीके के वीडियो मुख्यधारा के मीडिया चैनलों तक नहीं पहुंच पाते हैं। क्या पत्रकार अब मौजूदा सत्ता के सामने सच नहीं दिखा पाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर आपकी टीवी को खोल कर देखेंगे तो उसमें आपको सब चंगा सी दिखाई देगा बहस चलती होंगी और सत्ता की वाहवाही चलती होगी और दो-तीन लोग बैठे हुए होंगे और धार्मिक रंग देकर बहस को दिखाया जा रहा होगा आपको लगेगा कि भारत में सब कुछ ठीक-ठाक है।

जिस बच्ची का सोशल मीडिया पर पोछा लगाते हुए वीडियो वायरल हो रहा है वह यूपी के देवरिया के एक जिला अस्पताल का वीडियो है। आपने देखी होगी कि यूपी के जिला अस्पतालों की क्या हालत है। पिछले कुछ दिनों की बात ही है कि मिर्जापुर में मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर एक पत्रकार ने वीडियो बनाया था जिसके बाद उस पत्रकार पर भी एफ आई आर हो गई थी। ऐसा दौर आ गया है कि आप सच भी नहीं दिखा पाएंगे।