जो बोया था वो काट लीजिए , आपने जो फसल बोयी थी , वह लहलहा रही है जो इस समय माहौल है , उसका मजा लीजिए , पढ़े

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार अपने फेसबुक पेज पर ब्लॉग लिखते रहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने कल जो ब्लॉग लिखा उसका उन्होंने सबसे ऊपर लिखा कि जैसा बोया था वैसा काट लीजिए। लेकिन एक बॉलीवुड फिल्म में गाना भी है जिसके बोल हैं जो बोएगा वो पाएगा। और अगर आप पूरा गाना सुनना है तो आप यूट्यूब पर जाइए सर्च कीजिए और उस गाने के बोल सुनिए उस गाने के मतलब क्या है।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा कि उनके पास रोजाना ढेरों छात्रों के मैसेज आते रहते हैं। अपनी तरह तरह की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के पास मैसेज करते रहते हैं क्योंकि उन छात्रों को उम्मीद है । लेकिन इस बार छात्रों ने लिखा कि उनकी परीक्षाएं रद्द की जाएं सभी कोरोनावायरस संक्रमण भारत में तेजी से फैल रहा है इस पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने लिखा कि मैं शिक्षा मंत्री नहीं हूं और ना ही यूजीसी हूं।

बस पत्रकार रवीश कुमार अपने फेसबुक पेज पर आए दिन छात्रों की समस्याओं के लिए ब्लॉक लिखते रहते हैं। लेकिन सवाल यह है क्या गोदी मीडिया के एंकर इन छात्रों की परेशानी पर सवाल उठाएंगे। रवीश कुमार आगे लिखते हैं। कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान परीक्षाएं रोकने के लिए छात्र सुप्रीम कोर्ट भी गए और उन्होंने अपनी मांग रखी कि कोरोनावायरस संक्रमण के चलते हुए परीक्षाएं अभी नहीं की जाएं लेकिन छात्रों की सुनवाई 10 अगस्त तक टाल दी गई।

देश कोरोनावायरस संक्रमण से जूझ रहा है वहीं देश के कुछ प्रदेश ऐसे हैं जो बाढ़ से ग्रस्त हैं। और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों से भी छात्र परेशान हैं। क्योंकि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले 18 लाख के पार चले गए हैं। कल यह मामले 17 लाख के पार हुए थे और आज 18 लाख के पार हो गए। और इसी खतरे की वजह से छात्र कह रहे हैं कि उनकी परीक्षाएं रद्द करा दी जाएं।

यूजीसी की ओर से एक आदेश जारी होता है जिसमें यह बताया जाता है कि सितंबर के अंतिम वर्ष तक परीक्षा पूरी हो सकती है। लेकिन जिस तरीके से कोरोनावायरस संक्रमण तेजी से फैल रहा है तो सितंबर के अंत तक कोरोनावायरस संक्रमण के कितने केस होंगे। कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण सेमरी प्रतिदिन 55 हजार के करीब पाए जा रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने आगे लिखा कि कई राज्यों में बाढ़ भी आ गई और लोग वहां बाल से ग्रस्त हैं।

कोई छात्र अपने परिवार को आर्थिक समस्या से बचाने में लगा हुआ है तो कोई परिवार वालों में फंसा हुआ है। लेकिन परिवार को बेटे पर उम्मीद होती है की बड़ी कामयाबी मिले एक अच्छी नौकरी मिले जिसके बाद वह अपने परिवार को चला सके। जब देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था तब छात्र जहां थे वहीं फंस गए थे कोई अपने घर पर फस गया था तो कोई किसी राज्य में फस गया था किसी की किताब कहीं रह गई थी ।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने आगे लिखा कि जब सुप्रीम कोर्ट से छात्रों को राहत नहीं मिली तो फिर इसमें मैं क्या कर सकता हूं। एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार पहले भी बेरोजगारी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं मौजूदा सरकार नौजवानों को न जाने क्या-क्या सलाह देती रही वह देश के भविष्य थे लेकिन उनके भविष्य पर कभी भी मौजूदा सरकार ने ध्यान नहीं दिया । क्योंकि छात्र इस देश के भविष्य थे उन्हें सहारे की जरूरत थी।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार आगे लिखते हैं कि छात्रों की स्थिति इतनी ठीक नहीं है कि वे अभी फीस दे पाए। भारत में कोरोना वायरस के कारण नौकरियां जा चुकी हैं जो लोग प्राइवेट कंपनियों में काम करते थे उनकी भी नौकरियां चली गई है कंपनियां भी बंद हो गई है । वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने छात्रों की बढ़ती हुई फीस को लेकर कई कार्यक्रम चलाएं उस खबर को अपने प्राइम टाइम में भी शामिल किया लेकिन उस खबर को चलाने से कोई फर्क नहीं पड़ा।

और इन कार्यक्रम को कई बार टीवी पर दिखाया भी गया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। बेरोजगारी के मुद्दे पर भी कई बार सवाल उठाएं और भारत में गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठाए लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा सब अपनी अपनी राजनीति में व्यस्त थे। कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है । जब छात्रों को नौकरियां नहीं मिल रही थी तब मौजूदा सरकार ने पकोड़ा तलने की सलाह दी थी लेकिन उस पर भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा कि यह कौन सी सलाह दी जा रही है।

जो आपने फसल बोई थी वह तैयार हो गई है लहलहा उठी है आज जो माहौल है उस फसल के साथ मजा लीजिए नौकरी बेरोजगारी शिक्षा इसके बारे में मत देखिए। जब भी मन उदास हो तो टीवी खोल कर बैठ जाएं वहां आएंगे आपका मनोरंजन करा ही देगा। जो बोया था उसे काट लीजिए फीस अगर बढ़ गई है तो दे दीजिए । क्योंकि फीस भी आपको ही देना है। कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं इसलिए सावधानी बरतें।