राहुल गांधी ने अर्थव्यवस्था , कोरोनावायरस , और चीन को लेकर लगातार केंद्र सरकार को सतर्क किया था , लेकिन चेतावनी देने के बाद उनका मजाक उड़ाया गया

राहुल गांधी ने समय-समय पर देश की विफलताओं को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किए हैं उन्हें संकेत दिए थे। 30 जनवरी को भारत में कोरोनावायरस का पहला केस सामने आया था। और राहुल गांधी ने 12 फरवरी को कोरोनावायरस को लेकर ट्वीट किया था लेकिन ट्वीट करने के बाद उनका मजाक उड़ाया गया। और उस वक्त हो क्या रहा था गुजरात में लाखों लोगों के बीच नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम चल रहा था।

उसके बाद नतीजा यह हुआ कि आज कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 13 लाख से भी पार पहुंच गई है। जब उस वक्त राहुल गांधी ने कोरोनावायरस को लेकर केंद्र सरकार को सतर्क रहने को कहा था तब उनका सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया गया था। ट्वीट आज भी मौजूद है राहुल गांधी ने 12 फरबरी को ट्वीट किया था। राहुल गांधी ने कोरोनावायरस ही नहीं और विषयों पर भी केंद्र सरकार को जगाया था।

विपक्ष के नेता जो अर्थव्यवस्थाओं को लेकर बेरोजगारी को लेकर सवाल उठाते हैं वह किसी भी देश के नहीं है वह भी भारत के ही हैं। लेकिन हमारा गोदी मीडिया नहीं दिया सरकार से सवाल करने वालों को विदेश का समझता है। और दूसरी एक बड़ी बात और है जब जब राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं तब तक मीडिया ने उन्हीं को दोषी ठहराया है सरकार से सवाल पूछने के बजाय मीडिया ने राहुल गांधी पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।

इसका मतलब साफ है कि कोई भी सरकार से सवाल पूछा जाएगा तोगोदी मीडिया के एंकर उसी पर सवाल खड़ा कर देंगे। यानी पहले आपको प्रवक्ताओं से सवाल जवाब करने की बाद में न बताएं कि पहले आप इन गोदी मीडिया के एंकरों से सवाल-जवाब करोगे। क्योंकि यह सरकार से सवाल करने वाले तो हैं नही। क्योंकि जब भी सरकार सवालों के घेरे में आती है यह पूर्ण बहुमत में बचाव में उतर आते हैं।

राहुल गांधी ने चीन को लेकर लगातार सरकार को जताया है। लेकिन जब सरकार सो रही है और विपक्ष की सुन ही नहीं रही है तो इसमें कहने वाले का क्या कसूर। चीन को लेकर लगातार खबरें आ रही थी कि चीनी सेना घुसपैठ कर रही है विपक्ष भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े कर रहा था। चीनी सेना भारत में घुस रही है। लेकिन हुआ क्या इसके बाद बीजेपी के प्रवक्ता पात्रा ने सवाल पूछने वालों को चाइनीज एजेंट बता दिया

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान आया कि कि भारत की सीमा में कोई घुसा ही है। और बस क्या था इसके बाद गोदी मीडिया भी यही कहने लगा कि भारत की सीमा में कोई गुस्सा ही नहीं है यानी जब यह मीडिया कहने लगा और भारत के प्रधानमंत्री ने बात करने लगे तो विपक्ष इस सवाल से कमजोर पड़ गया जो केंद्र सरकार पर सवाल उठाया था कि चीनी सेना घुसपैठ कर रही है। लेकिन गोदी मीडिया ने विपक्ष पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।

आज भी देश में कोई मामला आता है सबसे पहले उसमें मीडिया मुस्लिम एंगल ढूंढने की कोशिश करता है। और अगर कोई विपक्ष का नेता इसमें बिगड़ती व्यवस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार से सवाल करता है तो केंद्र सरकार तो बाद में जवाब देती है पहले गोदी मीडिया ही आगे खड़ा हो जाता है। जब केंद्र सरकार के सवाल पूछने पर गोदी मीडिया आगे खड़ा हो जाता है तो इसका क्या संकेत है