अगर डॉक्टर कफील खान जेल से बाहर होते , तो कहीं ना कहीं कोविड-19 का इलाज करने में सबसे आगे होते

डॉ कफील खान आज अगर जेल से बाहर होते तो कोरोनावायरस के इलाज करने में सबसे आगे होते क्योंकि डॉक्टर कफील खान उस वक्त भी बच्चों को बचाने में सबसे आगे रहे । लेकिन अगर डॉक्टर कफील खान का इतिहास देखा जाए तो जहां भी लोग मुसीबत में फंसे हैं डॉक्टर कफील खान खुद पहुंचे हैं खुद पहुंचे भी और अपनी टीम को साथ लेकर भी पहुंचे हैं।

डॉ कफील ने जिस तरीके से बच्चों को बचाया था वह तस्वीरें आज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं लोग डॉ कफील को जेल से रिहा करने की मांग कर रहे हैं। और यही कह रहे हैं कि आज अगर डॉक्टर कफील जेल से बाहर होते तो जो लोग कोरोनावायरस से परेशान हैं उनको मदद पहुंचाने में सबसे आगे खड़े होते। डॉ कफील खान जिन्हें एनएसए लगाकर जेल में डाल दिया गया है।

डॉक्टर तो हमारी ढाल हैं क्योंकि डॉक्टर हमें हर बीमारी से ढाल की तरह आगे खड़े हो जाते हैं । आज पूरे भारत में कोरोनावायरस जैसी बीमारी फैली हुई है लोग हर रोज इस बीमारी से बीमार हो रहे हैं अस्पतालों में भीड़ लगी हुई है आज डॉक्टर ढाल बनकर लोगों की मदद पहुंचा रहे हैं। लेकिन उसी ढाल को एनएसए लगाकर एक पिंजरे में डाल दिया गया है। और अगर भारत में देखा जाए तो कोरोनावायरस लगातार आगे की ओर बढ़ता चला जा रहा है।

डॉ कफील खान को जिस तरीके से जेल में डाल दिया गया है। अगर उनका इतिहास देखा जाए तो उनका इतिहास भी ऐसा नहीं है उनकी खता यह थी कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जाकर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भाषण दिया था। लेकिन यहां नेता किसी के खिलाफ बोलकर इलेक्शन जीत जाते हैं । और डॉ कफील खान के इसी भाषण की वजह से उन्हें जेल में डाल दिया गया उन पर एनएसए लगाया गया कि डॉ कफील खान से लॉयन ऑर्डर को खतरा है।

10 अगस्त 2017 में गोरखपुर के एक हॉस्पिटल में 60 बच्चों की जान चली गई थी। उस वक्त भी डॉक्टर कफील खान एक फरिश्ते की तरह उतरे थे और उन्होंने बच्चों को बचाया था उन्होंने जल्द से जल्द अपनी टीम के साथ ऑक्सीजन का इंतजाम किया था और हॉस्पिटल में जो बच्चे बीमार थे । उन्हें डॉक्टर कपिल ने बचाया था। डॉ कफील खान की चर्चाएं चारों तरफ होने लगी थी कि कैसे एक डॉक्टर कफील खान ने हीरो बनकर बच्चों की जान बचाई है।

लेकिन डॉ कफील खान ने बच्चों की जान बचा कर तो अच्छा काम किया था लेकिन बाद में डॉक्टर कफील खान को ही जेल बंद कर दिया गया था। सोचिए एक डॉक्टर ने बच्चों की जान बचाई थी उसे तो सम्मानित किया जाना चाहिए था लेकिन सम्मान के बजाय उन्हें जेल में डाल दिया गया और उन पर जांच बिठाई गई। लेकिन बाद में जांच टीम ने डॉ कफील खान को निर्दोष साबित कर दिया था । लेकिन इसके बाद डॉ कफील खान पर दोबारा जांच बिठा दी

क्या एक जिंदगी बचाने वाले इंसान से किसी को खतरा हो सकता है। आज डॉक्टर कफील खान जेल में बंद है और उन पर आरोप यह है कि उनसे लॉयन ऑर्डर को खतरा है। देखा जाए तो विकास दुबे से लॉयन ऑर्डर का खतरा था लेकिन फिर भी वह सत्ता का भरपूर संरक्षण मिलता रहा। क्या इस वक्त जब देश में कोरोनावायरस की महामारी फैली हुई है तब डॉक्टर कफील खान को बाहर होना चाहिए। डॉक्टर हमारी ढाल हैं। और अगर कफील खान जेल से बाहर होंगे तो कोविड-19 के इलाज में सबसे आगे होंगे