पढ़े लेख : समुद्र के किनारे बने रेत के घर की तरह है भारत का लोकतंत्र , जो सत्ता की आंधी में रेत का बना घर , पढ़ें पूरी खबर

आपने समुद्र के किनारे बने रेत के घरों को जरूर देखा होगा। नहीं देखा हो तो एक बार यूट्यूब पर जरा सर्च करके देख लें कि रेत के घर कैसे होते हैं। समुद्र पर अक्सर लोग एक छोटा सा रेत से छोटा सा घर बनाते हैं जिसे घरौंदा कहते हैं। बच्चे जाते हैं तो सबसे पहले समुद्र के किनारे जाकर घरौंदा ही बनाते हैं। जब ये घरौंदा बन कर तैयार होता है। तो एक समुद्र की लहर आती है और रेत के घर को खत्म कर देती है।

ठीक उसी तरह हमारे भारत का अब लोकतंत्र हो गया है। भारत का लोकतंत्र का समुद्र के किनारे बने रेत के घर की तरह हो गया है। 2014 से लेकर अब तक जब-जब भारत के लोकतंत्र पर जब जब धार्मिक लहराई है या राजनीतिक लहर आई है तब तब लोकतंत्र उस घरौंदा की तरह पानी में बह गया है। जिस लोकतंत्र में जनता के पास बहुत सारे अधिकार हैं अब वह जनता भूल चुकी है।

भारत के लोकतंत्र में हर वर्ग को समान सम्मान है। सत्ता में बैठे लोग उस समुद्र की लहरों के साथ हो गए हैं जो लहर कभी-कभी लोकतंत्र पर बाहर करती है और लोकतंत्र पर जब राजनीतिक लहर पड़ती है तो लोकतंत्र सहन नहीं कर पाता और वह समुद्र की लहरों के साथ बह जाता है। लोकतंत्र के मूल अधिकारों के बारे में कहा जाए तो लोकतंत्र में हर नागरिक के पास अधिकार है वह किसी से भी सवाल कर सकता है कोई भी नागरिक हो।

लेकिन आजकल ऐसी स्थिति हो गई है कि देश के लिए सवाल करना भी गुनाह हो गया है। सवाल करो तो देशद्रोही। आपको पता है सवाल पूछने पर देशद्रोही क्यों कहा जाता है। कि इससे अच्छा कोई तरीका नहीं है सवालों का जवाब नहीं देने का और सवालों से बचने का सबसे अच्छा यही तरीका है कि जो सवाल पूछे उसे देशद्रोही साबित कर दो दोबारा उसकी सवाल पूछने की हिम्मत ही नहीं होगी।

इस सरकार में कई ऐसे काम हुए हैं जिसमें लोकतंत्र को ताक में रख दिया गया है यानी यह भूल गए कि लोकतंत्र में क्या लिखा हुआ है। क्योंकि अब लोकतंत्र भी धर्म की हवाओं के सामने टिकता नहीं जब जब लोकतंत्र के ऊपर धार्मिक और राजनीतिक हवाएं आई हैं तब तक लोकतंत्र को खत्म कर दिया गया। लेकिन लोग उस लोकतंत्र को बार-बार याद दिलाने की कोशिश करते हैं। जो लोकतंत्र अब समुद्र के किनारे बने रेत के घर की तरह हो गया है।