पीएम केयर्स फंड को लेकर आई बड़ी खबर , नहीं करेगी जांच लोक लेखा समिति , पीएम केयर्स फंड की , पढ़ें पूरी खबर

पीएम केयर्स फंड यह वह फंड है जो कोरोनावायरस के शुरू होते ही बड़े-बड़े उद्योगपतियों बड़े-बड़े लोगों ने गरीबों की मदद के लिए और चिकित्सा सुविधाएं को संभालने के लिए दिया था। लेकिन इस पीएम केयर का फंड का क्या हुआ इसके बारे में जनता जानना चाहती थी कई बार सवाल उठे। लोगो ने पूछना चाहा इस पीएम केयर्स फंड के बारे में लेकिन उनके सवाल का जवाब नहीं मिला।

पीएम केयर्स फंड पर शुरू से ही यही सुनने में आ रहा है जब से यह पीएम केयर्स फंड बना है और लोगों ने कोरोनावायरस से बचने के लिए करोड़ों रुपए का इसमें दान दिया है तभी से सरकार कह रही है कि पीएम केयर्स फंड का ऑडिट नहीं हो सकता तो नहीं हो सकता। आखिर पीएम केयर्स फंड की जांच कराने में क्या जा रहा है। पीएम केयर्स फंड का हिसाब किताब देने में क्या जा रहा है। हिसाब किताब देने में कोई बुरी बात तो नहीं है ना।

लेकिन अब यह बड़ी खबर आ रही है कि लोक लेखा समिति पीएम केयर्स फंड की जांच नहीं करेगी। लोक लेखा समिति पहले भी 2जी स्पेक्ट्रम की जांच कर चुकी है। लेकिन अब यह लोक लेखा समिति पीएम केयर्स फंड की जांच नहीं कर पाएगी । एनडीटीवी की खबर के मुताबिक लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी बताते हैं कि जब लोक लेखा समिति की बैठक हुई थी जिसमें बीजेपी सदस्य शामिल हुए थे। लेकिन अधीर रंजन के इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी । और ये ऐसे प्रस्ताव में रोक लगी है इस बैठक में बीजेपी के सदस्य मौजूद थे।

आखिर पीएम केयर्स फंड में पैसा गरीबों की मदद को लिए और सरकारी सुविधाएं संभालने के लिए दिया गया था। और यह पैसा जनता का ही है किसी और का नहीं है तो अगर जनता ही इसका ब्यौरा जानना चाहती है तो इसमें गलत क्या है। जब आप अपनी जगह सही है तो किस बात का डर है। हर नागरिक जानना चाहता है कि पीएम केयर्स फंड में किसने कितना पैसा दिया कितना स्वास्थ्य सुविधाओं को संवारने के लिए दिया गया।

और कितना पैसा कोरोनावायरस के चलते हुए गरीबों की मदद के लिए दिया गया। अगर इसकी जानकारी जनता तक आती है और जनता इस जानकारी को जानना चाहती है तो इसमें क्या गलत है। क्योंकि जब कोरोनावायरस को देखते हुए देश में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा की गई थी तब गरीब मजदूर पैदल चलकर अपने घरों पर पहुंच रहे थे। लेकिन लॉकडाउन लगने से पहले ही पीएम केयर्स फंड में लोगों ने दान देना शुरू कर दिया था।

और उन्होंने यह पैसा यह सोच कर दिया था कि यह पैसा गरीब जनता और स्वास्थ्य सुविधाओं को संभालने के काम आएगा। लेकिन सरकार को इसका ब्यौरा देते हुए क्या दिक्कत है कि अगर वाकई उन्होंने गरीबों के लिए या स्वास्थ्य सुविधाएं संवारने के लिए पीएम केयर्स का पैसा खर्च किया है। तो इसका ब्यौरा देते हुए मौजूदा सरकार के लिए क्या परेशानी है। आखिर देश जानना चाहता है कि जनता द्वारा दिया गया पैसा कहां कहां खर्च हुआ देश जानना चाहता है।