अगर विकास की गाड़ी ना पलटती , तो खुल जाते बड़े-बड़े नेताओं के राज , पढ़े पूरी खबर

यह बात तो बिल्कुल साफ है कि अगर आज विकास दुबे की गाड़ी ना पलटती तो ना जाने कौन-कौन से राजनेताओं पुलिस अधिकारियों नौकरशाहों की पोल खुल कर जनता के सामने आ जाती। मौजूदा सरकार ने जिस तरीके से विकास दुबे की मददगार साबित हुई है। कि कैसे वह तीन राज्यों में घुसता रहा और उसे पुलिस नहीं पकड़ पाई उसे मामूली से एक गार्ड ने पकड़ लिया। फिर वहां उज्जैन की पुलिस आ जाती है और विकास दुबे को गिरफ्तार कर लेती है।

विकास दुबे का जो सुबह 7 बजे एनकाउंटर हुआ है वह बिल्कुल फर्जी एनकाउंटर है जब विकास दुबे को ले जाया जा रहा था तो उस वक्त मीडिया विकास दुबे की गाड़ी के पीछे जा रहा था लेकिन मीडिया को बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। जहां कार फिसली है ना वहां कोई गड्डा है ना पानी है ना कोई ज्यादा गाड़ी में नुकसान हुआ है। जिसने उज्जैन में आकर मंदिर पर गिरफ्तारी दी हो वह क्या भागने की कोशिश करेगा।

अगर विकास दुबे कोर्ट में जाकर यह खुलासा कर देता कि उसका संग साथ देने वाले राजनेता और बड़े-बड़े पुलिस अफसर और नौकरशाह कैसे उसकी मदद करते। आज उन राजनेताओं ने पुलिस अफसरों ने नौकरशाहों ने चैन की सांस ली होगी और सोचा होगा कि चलो अब खेल खत्म हुआ । कम से कम राज खुलने से बच गए । पुलिस ने सिर्फ बुरे को खत्म किया है बुराई अभी भी बाकी है एक विकास दुबे जाएगा तो उसकी कुर्सी पर कोई दूसरा आकर बैठ जाएगा।

क्योंकि पहले ही सोशल मीडिया पर वह फोटो वायरल हो रही थी जिसमें जय बाजपेई जोकि विकास दुबे का बहुत करीबी है । बड़े-बड़े मंत्री और पुलिस अधिकारियों के साथ खड़े होकर फोटो खिचाएँ हैं । यह खबर भी आई थी कि जय बाजपेई की 8 साल पहले एक चाय की दुकान थी उसके बाद जय बाजपेई विकास दुबे के संपर्क में आया और फिर उसके साथ गंदा व्यापार करके करोड़ों का मालिक बन गया। क्योंकि अगर विकास दुबे को लेकर खुलासे होते तो उसमें सत्ताधारी नेता घेरे में आते।

और मुख्यधारा का मीडिया क्या कर रहा है कि जैसे ही विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ बस भारतीय मुख्यधारा की मीडिया ने यह समझ लिया कि अब अपराध खत्म हो जाएगा मामला शांत हो जाएगा। हां यह तो हकीकत है कि मामला विकास दुबे का बिल्कुल खत्म हो गया जो राज खुलने थे वह भी अब खुल नहीं पाएंगे उन पर बिल्कुल पर्दा डल गया। जो सच्चाई जनता के सामने आनी थी वह अब नहीं आ पाएगी।

ऐसी कहानी से यह समझना मुश्किल हो जाता है कि फिल्म को देखकर यह घटना होती है या फिल्मों में ऐसा होता था। जमाना ऐसा हो गया है लोग क्राइम पेट्रोल को भी देख रहे हैं। क्राइम पेट्रोल सीरियल में भी ऐसी कहानियां मिलती है । आपको बता दें कि यह सब कार्यक्रम स्क्रिप्टेड था । क्योंकि वहां जो गवाह थे वह भी यही कह रहे थे । हमको गाड़ी फिसलने की कोई आवाज आई। यह कैसे संभव है। आज हर कोई इस पर सवाल खड़े कर रहा है सिवाय उनके जो सप्ताह की वाहवाही करते हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी कहते हैं कि अगर यह कार ना पलटती तो सत्ता पलट जाती यह जो कार पलटी है ना इसने सत्ता पलटने से बचा लिया है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया है। क्योंकि यह बात तो बिल्कुल सही है कि अगर विकास दुबे इस बात का खुलासा करता कि उसे संरक्षण कौन दे रहा था कौन-कौन से उसके संपर्क में पुलिस अधिकारी थे और कौन-कौन से उसके संपर्क में नेता और मंत्री थे।

सबसे ज्यादा गुनहगार तो वह होता है जो अपराधों को बढ़ावा देता है। आपने बुरे का अंत जरूर किया है लेकिन बुराई का अंत अभी नहीं हुआ है। क्योंकि कल उसी जगह अगर फिर कोई नेता सत्ता संरक्षण देगा पुलिस अधिकारी के संपर्क में रहेगा तो फिर एक विकास दुबे उसी जगह आ जाएगा। लेकिन जो 8 पुलिस के जवान शहीद हुए थे उन्हें इंसाफ नहीं मिल पाया। क्योंकि विकास दुबे कई राज खोलता लेकिन राज खोलने से पहले ही उसको खत्म कर दिया गया।

जो पुलिसकर्मी के 8 जवान शहीद हुए थे आज उन शहीद पुलिसकर्मियों के घरवाले बिल्कुल ना खुश हैं आज उनके मन में एक ही सवाल है कि उनके राज खुलते जो विकास दुबे को सत्ता का संरक्षण दे रहे थे और विकास दुबे उसका भरपूर फायदा उठा रहा था। क्योंकि विकास दुबे तो पुलिस प्रशासन को अपनी उंगली पर नचाता था क्योंकि उसे सत्ता की ताकत मिल रही थी । और यह ढेर सारे राज खुलते मगर खुलने से पहले ही विकास दुबे के साथ वह सारे राज खत्म हो गए क्योंकि उन राज्यों से सत्ताधारी नेता कटघरे में आ रहे थे।