विकास दुबे : 1 दिन पहले ही हो गया था उज्जैन में 8 पुलिस अफसरों का ट्रांसफर , विकास दुबे की गिरफ्तारी से 1 दिन पहले हुआ था पुलिस अफसरों का ट्रांसफर , विस्तार से पढ़े पूरी खबर

यह इस वक्त की बहुत बड़ी खबर है की जिस उज्जैन से विकास दुबे गिरफ्तार किया गया था उसके पुलिस अफसरों का 1 दिन पहले ट्रांसफर कर दिया गया है। पहले तो यह कहा जा रहा था कि यह गिरफ्तारी नहीं है यह सरेंडर हुआ है। इसी बीच जब यह खबर आई है कि उज्जैन से मात्र 1 दिन पहले पुलिस अफसरों का तबादला हुआ है। और इस खबर से साफ स्पष्ट हो जाता है कि सब मिलीभगत थी। इंडिया टुडे के पास पुलिस अफसरों के ट्रांसफर के आदेश की कॉपी है।

जो वरिष्ठ पत्रकार यह आरोप लगा रहे थे कि विकास दुबे ने सरेंडर किया है वह पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया है क्योंकि उससे पुलिस की कई टीमें पिछले कई दिनों से खोज रही थी उसके ऊपर इनाम भी रखा गया था। लेकिन वह बचता रहा राज्यों में जाता रहा। किन सवाल यह है कि वह सब जगह घूमता रहा लेकिन जो पुलिस टीम उसे ढूंढ रही थी उसके हाथ क्यों नहीं लगा। अब इस रिपोर्ट से बिल्कुल स्पष्ट हो गया है कि पुलिस अफसरों की ओर विकास दुबे की मिलीभगत से यह नाटक हुआ है।

1 दिन पहले जिन पुलिस अफसरों का ट्रांसफर हुआ है ।आदेश का क्रमांक T3727 है । और जो दस्तावेज है वह 8 जुलाई का है। ट्रांसफर की कॉपी पर मनोज कुमार सिंह के हस्ताक्षर भी हैं जो के उज्जैन के पुलिस अधीक्षक हैं। सवाल ये भी है कि क्या यह मिलीभगत वाली पुलिस उन 8 पुलिसकर्मियों को भी भूल गई जो उस मुठभेड़ में शहीद हो गए थे आज भी उनके घर वाले उनके लिए इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।

देखिए यह बात तो बिल्कुल स्पष्ट है इस तरह की खबरें मीडिया तो आपको दिखाने वाला है नहीं। क्योंकि अगर यह मामला उत्तर प्रदेश का ना होकर किसी और प्रदेश का होता जहां विपक्ष की सरकार होती तो मीडिया ने अब तक ऐसे ऐसे खुलासे कर दिए होते जिनका पता सिरा भी नहीं होता। यह जो नाटकीय अंदाज में गिरफ्तारी हुई है। इससे जनता पुलिस पर न्याय के लिए क्या भरोसा रखेगी।

क्या उन पुलिसकर्मियों को इंसाफ मिलेगा। जो पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। क्योंकि विकास दुबे को सत्ता का भरपूर संरक्षण मिल रहा था। किस तरीके से उसकी गिरफ्तारी होती है जैसे उसने साधारण सा गुनाह किया हो। अगर ऐसे ही सरकारें अपराधियों की मददगार साबित हुई तो लोग इंसाफ के लिए पुलिस पर विश्वास करना भूल जाएंगे।