ट्विटर पर टेक महिंद्रा कंपनी के कर्मचारी लगा रहे हैं गुहार , कह रहे हैं कोविड-19 से बचाओ , पढ़े खबर

भारत में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और दिल्ली में रिकवरी रेट भी बढ़ रहा है। भारत में करीब 1 करोड़ टेस्टिंग हो चुकी है। इसमें अभी तक कोरोनावायरस के कुल मरीज 6 लाख 75 हज़ार हो गए हैं। और जो प्रतिदिन संक्रमित मामले आ रहे हैं वह भी लगातार बढ़ रहे हैं। इन संक्रमित मामलों की प्रतिदिन आने वाली संख्या बढ़ते बढ़ते 24 हजार तक पहुंच चुकी है जो एक बेहद चिंता वाली बात है।

ट्विटर पर आज कई ऐसे ट्वीट दिखाई दिए जिसमें लोग खुद को कोरोनावायरस से संक्रमित होने की बात कह रहे हैं और वह यह भी कह रहे हैं कि हम टेक महिंद्रा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी हैं। और हम कोरोनावायरस संक्रमण से संक्रमित हो गए हैं। लोगों ने अपनी समस्या का समाधान करने के लिए ट्वीट करते समय अलग-अलग लोगों को टैग किया किसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को टैग किया किसी ने नोएडा पुलिस को टैग किया और किसी ने टेक महिंद्रा कंपनी को भी टैग किया।

आखिर कोरोनावायरस का संक्रमण देश में तेजी से फैल रहा है लेकिन मीडिया इस पर जिक्र करने को बिल्कुल तैयार नहीं है यह लोग सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन क्या यह खबर मीडिया तक पहुंच नहीं पाती हैं या इन खबरों का कोई महत्व नहीं है। यह लोग परेशान हैं तो ऐसे में इन्हें मुख्यधारा का मीडिया क्या इनकी आवाज को सरकार तक नहीं पहुंचा सकता है। ट्विटर पर फालतू के मीम तो लोगों को जल्दी दिख जाते हैं लेकिन किसी की परेशानी नहीं दिखती हालांकि चाहे वह मीडिया हो या मौजूदा सरकार।

लेकिन जब कोरोनावायरस की सतर्कता को लेकर सवाल जनता को उठाने थे उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाली और ताली बजवा कर देश की जनता का ध्यान बटवा दिया। जो सवाल करने का समय था वह थाली और ताली बजाने में देश की जनता ने और युवाओं ने निकाल दिया। एक वही समय था बेरोजगारी भत्ता मांगने का जैसे अमेरिका में कोरोनावायरस संक्रमण फैलने पर बेरोजगारी भत्ते की मांग की गई थी क्या भारत में यह कार्य नहीं हो सकता था। भारत का मुख्यधारा का मीडिया और सरकार दोनों ही मुद्दों से गायब हैं।

कोरोनावायरस की वजह से लोगों में बेरोजगारी इतनी बढ़ रही है अर्थव्यवस्था तो पहले से ही भारत की गिरी हुई चल रही थी और कोरोनावायरस में अर्थव्यवस्था को और ज्यादा झटका लगा है लेकिन मुख्यधारा की मीडिया ने अर्थव्यवस्था पर तब सवाल नहीं किया जब देश में कोरोनावायरस ही नहीं था। कंपनियां पहले भी बहुत बंद हुई बैंकों में ताले लगे लेकिन किसी ने कोई सवाल नहीं किया जब बैंक बंद होने से बैंकों में में फस गया तो किसी कैमरे के सामने हल्का सा दुख जाहिर करने से परेशानी कम नहीं हो जाती।

भारत का युवा रोजगार को लेकर पहले से ही परेशान था क्योंकि जब देश में कोरोनावायरस नहीं था। तब युवाओं को कुछ राजनेता पकोड़ा तलने की सलाह दे रहे थे। रोजगार न मिलने से युवाओं का भविष्य बर्बाद हो गया । क्योंकि युवाओं को सरकार की तरफ से रोजगार को लेकर कोई सहयोग नहीं मिला। और वह तब से लेकर आज तक अपनी आवाज को उठा रहे हैं और कुछ युवा आज भी सोशल मीडिया पर मीम शेयर करने में व्यस्त हैं