मरीज को लेकर अस्पतालों के लगाते रहे चक्कर , लेकिन किसी अस्पताल ने नही किया भर्ती , अस्पताल के दरवाजे पर ही मरीज ने

बेंगलुरु में एक कपड़ा व्यापारी को अचानक तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ हुई। यह लक्षण देखकर घर वाले भी घबरा गए और उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल ले जाने लगे। एंबुलेंस को बुलाया गया उसमें मरीज को ले जाया गया। एंबुलेंस से उस कपड़ा व्यापारी मरीज को परिवार 18 अस्पतालों में लेकर गया लेकिन सभी ने भर्ती करने से इंकार कर दिया।

जब 18 अस्पतालों ने मरीज को भर्ती नहीं किया तब परिवार वालों ने 30 से ज्यादा अस्पतालों में फोन किया लेकिन सभी ने फोन पर ही भर्ती करने से मना कर दिया। 36 घंटे तक मरीज के लिए अस्पताल ढूंढा गया। लेकिन अस्पताल वालों ने यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास बेड की व्यवस्था नहीं है।

मरीज के भतीजे ने बताया कि उन्हें शनिवार को तेज बुखार आया था और बुखार के साथ-साथ उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इसके बाद उन्हें एंबुलेंस से एक अस्पताल में ले गए। लेकिन अस्पताल वालों ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। अस्पताल वालों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उसके पास बेड की व्यवस्था नहीं है।

इसके बाद भतीजे ने कई बड़े-बड़े अस्पतालों को फोन लगाया लेकिन सभी ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। भतीजे ने आगे बताया कि अस्पताल के डॉक्टर के पैरों पर गिर पड़े लेकिन फिर भी अस्पताल वालों ने भर्ती नहीं किया। लेकिन इसके बाद भी मरीज के लिए अस्पताल खोजते रहे ।

इसके बाद बॉरिंग एंड लेडी कर्जन हॉस्पिटल के यहां गए। लेकिन इस अस्पताल वालों ने भी इंकार कर दिया। अस्पताल वालों ने कहा कि पहले कोरोनावायरस की जांच हो उसके बाद ही इन्हें भर्ती करने के लिए सोचा जा सकता है। फिर मरीज का कोविड 19 टेस्ट कराया जाता है। टेस्ट कराने के बाद जब बॉरिंग एंड लेडी कर्जन हॉस्पिटल लौटे

और अस्पताल से भर्ती करने को कहा तो अस्पताल भर्ती करने के लिए मरीज को तैयार हो गया। लेकिन अस्पताल वाले मरीज को भर्ती करने के लिए तैयार तब हुए थे जब मरीज की अस्पताल के गेट पर जान जा चुकी थी।