प्रवासी मजदूरों पर बोले अमित शाह , लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के लिए हमने बहुत किया , लेकिन मीडिया ने नहीं दिखाया

भारत में जब लॉकडाउन को लगाया गया। उस समय कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की संख्या बहुत कम थी। लेकिन यह लॉकडाउन नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम करके और मध्य प्रदेश में सरकार बनाकर उसके बाद लॉकडाउन को लगाया गया । लॉकडाउन लगने के बाद जिन प्रवासी मजदूरों के पास खाने को पैसा नहीं था वह उसी समय आत्मनिर्भर बनकर घर की ओर अपने परिवार के साथ लौट रहे थे।


लेकिन कई बार लॉकडाउन को लगाया गया लेकिन यह सारे लॉकडाउन बिना तैयारी के लगाए गए बाद में इन लॉक डाउन के परिणाम भी विफल साबित हुए। लॉक डाउन की विफलताएं यह थी की लॉकडाउन को लगा तो दिया गया लेकिन गरीब मजदूरों के लिए सिर्फ 4 घंटे की मोहलत दी थी। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताली थाली बजवाने के लिए 4 दिन का समय दिया था

सोशल मीडिया पर आपने बहुत सारी तस्वीरें देखी होंगी जिसमें गरीब मजदूर कैसे-कैसे पैदल चलकर अपने घरों पर पहुंचे थे। गर्भवती महिलाएं अपने परिवार के साथ पैदल चलकर घर पहुंची। मजदूर साईकिल से पैदल गर्म तपती सड़को पर पैदल चलकर घर लौटे थे लेकिन फिर भी अमित शाह कहते हैं कि हमने प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत कुछ किया लेकिन मीडिया ने उस को दिखाया नहीं।

जब देश में लॉकडाउन को लगाया गया उस समय कई अस्पतालों में डॉक्टरों के पास कोरोनावायरस से लड़ने के लिए जरूरी सामान नहीं था और वे लगातार यह शिकायत कर रहे थे। कि उनके पास पीपीई किट मास्क गिलब्स नहीं थे । और वह लगातार अपने विभाग से यह गुहार लगा रहे थे कि उन्हें कोरोनावायरस से लड़ने के लिए जरूरी सामान मुहैया कराया जाए।

अमित शाह ने अपने बयान में कहा कि लॉकडाउन में उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए बहुत कुछ किया लेकिन मीडिया ने उसे दिखाया ही नहीं। जब देश में कोरोनावायरस को लेकर लॉकडाउन लगाया गया था 5 दिन तो मीडिया ने कोरोनावायरस पर कवरेज की और उसके बाद  तबलीगी जमात का मामला सामने आ गया था

देश में गरीब मजदूर पैदल चल रहे थे लेकिन मीडिया ने तब्लीगी ज़मात पर भरपूर कबरेज किया था । और मीडिया ने सारा दोष तबलीगी जमात के सहारे मुस्लिमों पर रख दिया। और मीडिया ने तबलीगी जमात के सहारे मुस्लिमो को टारगेट किया । और फिर इसके परिणाम यह हुए कि सब्जी फल को लेकर भी हिंदू-मुस्लिम होने लगा। सोशल मीडिया पर ढेरों वीडियो मौजूद है उसमें आप देख सकते हैं कि प्रवासी मजदूर किस तरीके से अपने घरों को लौटे हैं।