लगातार बढ़ रहे हैं भारत में कोरोनावायरस संक्रमित के मामले , चार लाख से पार हुए कोरोनावायरस के मामले , लेकिन मीडिया

भारत में कोरोनावायरस के मामले अब और ज्यादा तेजी पकड़ रहे हैं शुरू में यह मामले प्रतिदिन हजार के लगभग संख्या में बढ़ रहे थे । लेकिन अब यह मामले और ज्यादा तेजी पकड़ रहे हैं। पहले मार्च में किसी ने कहा था कि जून में कोरोनावायरस के मामले 7 लाख के करीब होंगे । लेकिन अगर इसी गति में कोरोनावायरस के मामले बढ़े तो 30 जून तक साढ़े 5 लाख से ज्यादा कोरोनावायरस के संक्रमित मामले होंगे ।

लेकिन जिस वक्त भारत में लॉकडाउन लगाया गया था उस वक्त लोगों में कोरोनावायरस को लेकर डर था लोग इस वायरस से बचने के लिए सतर्क रह रहे थे और अपना बचाव भी कर रहे थे लेकिन जब से कोरोनावायरस संक्रमण अब लाखों में फैला है और लॉकडाउन को भी खोल दिया गया है।

अब कोरोनावायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन जितना तेजी से यह मामले बढ़ रहे हैं उतना ही लोगों के मन से कोरोनावायरस को लेकर डर भी खत्म हो गया है। जो मजदूर लॉकडाउन में पैदल चल कर घर लौट कर आए थे । मजदूर अब काम पर वापस जा रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन को अनलॉक कर दिया गया है।

मजदूर आपस में बात कर रहे हैं कि अब कोई चिंता की बात नहीं अपनी सुरक्षा अपने हाथ है सरकार ने सभी भारतीयों को आत्मनिर्भर बना लिया है। लेकिन सबसे बड़ा विषय यह है अगर यह मजदूर फिर वापस लौटे तो पहले तो इनको क्वॉरेंटाइन किया गया था और लोगों ने बाहर से आने वाले लोगों पर कड़ी नजर भी रखी थी।

लेकिन जो मजदूर अब काम करने बाहर जा रहे हैं और जब वह मजदूर अपने घर लौटेंगे तो आप सोच सकते हैं कि कोरोनावायरस संक्रमण को रोकना कितना मुश्किल हो जाएगा। फैक्ट्रियों के मालिक मजदूरों को काम पर वापस लौटने को बुला रहे हैं और मजदूर जा भी रहे हैं। कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर हमारा भारतीय मीडिया हर रोज कोरोना की दवाई लेकर आ जाता है।

हमारा भारतीय मीडिया हर रोज कोरोना वैक्सीन की खबरें देता रहता है और यह भी बता देता है कि इस महीने में लॉन्च होगी और इसके रुपए इतने होंगे। यह खबरें अब से नहीं यह मार्च से चल रही है जब से भारत में लॉक डाउन लगाया गया है। हमारे देश के मीडिया में कोरोनावायरस को लेकर ज्यादा बहस नहीं होती है । क्योंकि इससे सरकार पर सवाल बनता है।