इस स्थिति में भी भारतीय मुख्यधारा की मीडिया सत्ता से सवाल पूछने को तैयार नहीं है , सरकार के बजाय सेना से सवाल पूछ रही है मीडिया

आपने देखा होगा जब सर्जिकल स्ट्राइक एयर स्ट्राइक की गई थी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका श्रेय भरपूर अपनी रैलियों ,सभाओं में लिया था। और मुख्यधारा की मीडिया ने भी इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। जब पुलवामा में घटना हुई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद जवानों के नाम पर वोट मांगे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयर स्ट्राइक हो चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो इसका भरपूर श्रेय अपने चुनावों में लिया था। हालांकि चुनाव आयोग ने यह साफ कर दिया कि कोई भी राजनीतिक पार्टी देश की सेना पर राजनीति नहीं करेगी। इन आप जानते ही हैं कि हमारे देश में चुनाव आयोग की हालत क्या है।

आज तक जो सबसे तेज है। आज तक की एंकर अपने कार्यक्रम में कहती हैं कि यह सवाल सरकार से नहीं करना चाहिए बल्कि हमें सेना से यह सवाल करना चाहिए क्योंकि वहां सेना की जिम्मेदारी है सरकार की नहीं। और इसी सहारे विपक्ष को लगातार चीन के मुद्दे पर निशाने पर गोदी मीडिया ले रहा है। आप यह पहले ट्वीट किया हुआ वीडियो देखिए

यह वही आज तक सबसे तेज की एंकर हैं जिन्हें 2 हज़ार के नोट में चिप दिखाई देती है। एक और एंकर हैं 2000 के नोट में चिप होने का पूरा विश्लेषण किया था और जनता को बताया था कि यह चिप कैसे काम करती है लेकिन जब चीन का मुद्दा सामने आया तो यह महोदय कह रहे थे की । चीन की सेना इकलौती संतान होती है और वह लड़ने से पहले सोचेगी

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस वक्त सेना की कामयाबी को अपने चुनावी भाषण में श्रेय लेते हैं। आज जब चीन हमारी सरहदों में घुस रहा है और हमारे प्रधानमंत्री बिल्कुल इस मुद्दे पर खामोश हैं। इसी राष्ट्रवाद का नाम लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आए थे देश में इस वक्त कोरोनावायरस संक्रमण फैला हुआ है लेकिन देश के गृहमंत्री अमित शाह डिजिटल रैलियां कर रहे हैं।

हमारा देश का मीडिया आज भी अपनी सरकार को बचाने के लिए न जाने कौन कौन से कार्यक्रम प्रसारित कर रहा है। अगर ऐसी स्थिति में भी गोदी मीडिया सरकार से सवाल करने के बजाय विपक्ष से सवाल पूछता है और जब चीन घुसपैठ करता है तो हमारे मीडिया को तो सरकार से इस मुद्दे पर सवाल करना चाहिए । लेकिन इस मुद्दे पर सरकार और सरकारी मीडिया दोनों ही खामोश रहे।