टेस्टिंग ज्यादा होगी तभी कोरोनावायरस से जंग जीती जा सकती है , लेकिन हमारी सरकार रैलियां करने में व्यस्त है और चुनाव प्रचार शुरू कर दिए हैं

भारत में नरेंद्र मोदी 2014 में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने लेकिन उस समय चुनाव में गुजरात मॉडल का जिक्र किया गया आज उसी गुजरात मॉडल की पोल खुल रही है जिसके अस्पतालों की हालत कालकोठरी से बदतर है। यह हम नहीं कह रहे हैं वहां के हाईकोर्ट ने कहा था उसके बाद जज साहब को बेंच से ही हटा दिया गया। अनलॉक वन के शुरू होते ही अमित शाह ने बिहार में डिजिटल रैली कर दी।

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी अपने भाषणों में अस्पतालों को लेकर जिक्र किया स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिक्र किया। बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में तीन तलाक , राम मंदिर , धारा 370 , एयर स्ट्राइक सर्जिकल स्ट्राइक , इन मुद्दों को अपने भाषणों में जोरों शोरों से जिक्र किया। लेकिन कोरोनावायरस काल में इन मुद्दों की चर्चा अमित शाह की डिजिटल रैली में भी हुई।

लेकिन आज जब देश में कोरोना वायरस फैला हुआ है तब आज स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की जरूरत है इन मुद्दों लोगों को इकट्ठा करके सुनाने की जरूरत नहीं है वह तो आप पिछले कई सालों से सुनाते हुए चले आ रहे हैं आज सरकार को कोरोना वायरस की टेस्टिंग बढ़ानी चाहिए। कोरोनावायरस काल में कोरोनावायरस टेस्टिंग कम करना और इसी कोरोनावायरस काल में चुनावी तैयारी करना यह देश और देश की जनता के लिए दुखद है।

यह बात तो बिल्कुल साफ है जितनी ज्यादा कोरोना वायरस की टेस्टिंग होगी हम पता लगा पाएंगे कि हमारे देश में कोरोनावायरस के संक्रमित कितने मरीज हैं तब हम उनका इलाज आसानी से कर सकते हैं और कोरोनावायरस को कंट्रोल भी कर सकते हैं अगर हम टेस्टिंग कम करेंगे तो कोई ना कोई मरीज छूटता रहेगा और फिर वह संक्रमित मरीज और लोगों से मिलता रहेगा और कोरोनावायरस के जो मामले हैं वह लगातार बढ़ते रहेंगे।

पहले भी सरकार ने कई गलतियां की हैं जिनकी वजह से आज पूरे देश में कोरोनावायरस फैल गया। लेकिन आज जब कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते हुए सामने आ रहे हैं और ऐसी स्थिति में लॉक डाउन को अनलॉक करना और चुनावी रैली करना बहुत दुखद है।