क्या नियम और कानून सिर्फ जनता के लिए बनाए गए हैं , नेताओं के लिए नहीं , पढ़ें पूरी खबर

कल बिहार में भारतीय जनता पार्टी के नेता अमित शाह डिजिटल रैली करते हैं लेकिन कोरोनावायरस को बिना मात्र दिए ही इन्होंने डिजिटल रैली शुरू कर दी। लेकिन कल अमित शाह ने बिहार में डिजिटल रैली की और अब उसके बाद पश्चिम बंगाल में यह डिजिटल रैली आगे होगी। बाहर हाल यह तो साफ है की चुनाव प्रचार शुरू हो चुके हैं।

हमारे देश में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते हुए जा रहे हैं और कोरोनावायरस को काबू करने में हमारी सरकार बिल्कुल फेल साबित हुई है और जब यह मामले ढाई लाख से ऊपर पहुंचे तब सरकार ने सब कुछ धीरे-धीरे खोलना शुरू कर दिया हालांकि पूरी दुनिया में अभी तक इस तरह से नहीं हुआ है। अन्य देशों में लॉक डाउन तभी खुला है जब कोरोनावायरस पर कंट्रोल किया गया है।

हमारे देश में कोरोना वायरस कंट्रोल करने के लिए नई तकनीक अपना ली है। और वह तकनीकी यह है कि अगर जांच कम होंगी तो मामले भी कम आएंगे लेकिन हकीकत तो यह है दोस्तों अगर सरकार जब तक ज्यादा से ज्यादा जांच नहीं करेगी तब तक कोरोनावायरस पर काबू नहीं किया जा सकता। कि हम बिना जांच किए पता ही नहीं लगा सकते कि भारत में कितने कोरोनावायरस के मरीज हैं।

तस्वीरों में आप देख रहे होंगे की अमित शाह रैली करने के लिए एंट्री करते हैं तो जितने लोग उनके पास खड़े हुए होते हैं उन सभी लोगों के मुंह पर मास्क लगा हुआ होता है लेकिन जो मास्क मुंह पर लगाने के लिए होता है। और जिसे सरकार लगातार जनता के लिए मुंह पर मास्क लगाने का निर्देश दे रही है। उसी मास्क को अमित शाह गले में लटकाए हुए हैं।

वह बात अलग है अगर आप अकेले में कहीं खड़े हैं या एकांत में हैं पर आपके पास कोई भी नहीं है तब आप इस मास्क को अपने मुंह से हटा सकते हैं। सोचिए आसपास लोग भी खड़े हुए हैं वह सभी नियमों का पालन कर रहे हैं लेकिन अमित शाह उसी मास्क के लिए गले में लटकाए हुए हैं।