बढ़ते कोरोनावायरस काल में , बिहार पहुंच गए हैं बीजेपी के रणनीतिकार , अमित शाह की डिजिटल रैली को सफल बनाने के लिए

भारत में कोरोनावायरस के मामले अब प्रतिदिन 10 हजार के आंकड़े को छू रहे हैं। और यह मामले प्रतिदिन अब तेजी पकड़ रहे हैं। कल अमित शाह की बिहार में डिजिटल रैली होगी 72 हजार बूथों को सजाया गया है डिजिटल इंतजाम किए गए हैं। और कल लोग अमित शाह के भाषण को सुनेंगे। क्या मीडिया में इतनी हिम्मत है कि वह बीजेपी से यह सवाल करें कि कोरोनावायरस के मामले जब बढ़ रहे हैं तो रैली करने की अभी क्या जरूरत है।

जब दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात में लोग इकट्ठे निकले थे तब मीडिया ने जमकर हल्ला काटा था लेकिन अब इस डिजिटल रैली में क्या तबलीगी जमात से ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होंगे जब तबलीगी जमात का मामला सामने आया था तब तो कोरोनावायरस के मामले भी कम थे अब तो यह मामले लगातार बढ़ रहे हैं और हर दिन आंकड़ा 10000 को छू रहा है ऐसे हालात में क्या रैली करना जरूरी है।

क्योंकि भारत के पिछलग्गू और सरकारी मीडिया में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह यह सवाल करें कि अभी बढ़ते कोरोनावायरस काल में रैली क्यों की जा रही है। इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होगी बल्कि सरकारी मीडिया अभी भी जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान पर खबरें चला रहा है। यह पाकिस्तान मीडिया में पिछले 6 सालों से बौखला रहा है। चीन हमारी सीमा के अंदर घुस आया है और इस खबर छिपाने की कोशिश की जा रही है।

इस डिजिटल रैली को सभी सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है और भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार अमित शाह की रैली को सफल बनाने के लिए बिहार के पटना शहर पहुंच गए। टोटल 72 हज़ार बूथ डिजिटल रैली सुनने के लिए बनाए गए हैं हर बूथ पर 50 से ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं होंगे। प्रत्येक विधानसभा से 5000 लोग डिजिटल रैली सुनने का लक्ष्य रखा है।

एक बूथ पर 50 लोग इकट्ठे होंगे तो 72000 बूथों पर कितने लोग इकट्ठे होंगे यह आप कैलकुलेट कर सकते हैं। क्या इन लोगों के इकट्ठे होने से कोरोना वायरस नहीं फैलेगा। हालांकि कल बिहार में अमित शाह की डिजिटल रैली होने जा रही है और कोरोना वायरस के चलते हुए भारतीय जनता पार्टी को कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है।