ट्रंप बोले – अगर भारत में कोरोनावायरस टेस्टिंग ज्यादा से ज्यादा हो , तो भारत में कोरोनावायरस संक्रमित के मामले अमेरिका से भी ज्यादा आएंगे

यह बात ट्रंप ही क्या भारत में कई लोग पहले ही सरकार को बता चुके हैं कि अगर टेस्टिंग ज्यादा होगी तो हम कोरोनावायरस मरीजों का पता लगा पाएंगे और जिससे कोरोनावायरस संक्रमण को काबू में किया जा सकता है। लेकिन टेस्टिंग ज्यादा से ज्यादा करने की वजह सरकार और निचले स्तर पर घटा रही है गुजरात में गुजरात सरकार ने कोरोनावायरस टेस्टिंग कम कर दी है ।

भारत में लॉक डाउन कब खोला गया जब कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों की संख्या 240000 को छू रही है। और इन मामलों को देखते हुए यह तो स्पष्ट हो गया है कि सरकार द्वारा लगाए गए सभी लॉक डाउन पूरी तरीके से फेल हो गए हैं। कोरोनावायरस की टेस्टिंग कम करके सरकार सिर्फ कोरोनावायरस संक्रमित मरीजों के आंकड़े छुपा सकती है कोरोनावायरस मरीजों को नहीं।

जब अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण फैला तब वहां कोरोनावायरस संक्रमण की टेस्टिंग तेजी से की गई और जितने मामले थे उस सभी सामने आए। और भारत में कोरोनावायरस की जांच किसी में लक्षण देखने पर ही हो रही है या कोई बाहर से आ रहा है बस वही अपनी जांच करा रहा है। भारत के गांव में सरकार कोई भी जागरूकता अभियान नहीं फैला रही है बल्कि चुनाव जीतने के लिए डिजिटल रैलियां की जा रही हैं।

जब देश में पहला लॉक डाउन लगा तभी सरकार को टेस्टिंग ज्यादा से ज्यादा करनी थी और सबसे बड़ी सरकार ने यह गलती की थी कि विदेश से लोग जो आए थे उनकी एयरपोर्ट जांच नहीं की गई थी केवल एयरपोर्ट पर 17 प्रतिशत लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी। वह वक्त था कोरोनावायरस को काबू करने का लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह वक्त थाली ताली घंटी परात लुटिया चम्मच आदि बजवाने में समय निकाल दिया।

अब इस वक्त कम टेस्टिंग में भी हर रोज 10000 के करीब मामले सामने आ रहे हैं लेकिन सरकार की नजर अब भी राज्य सरकार के चुनावों पर है। जब सरकार सभी लॉक डाउन में कोरोनावायरस को काबू करने में नाकाम रही तब सरकार ने जनता को आत्मनिर्भर बना दिया। अभी भी वक्त है कोरोनावायरस की टेस्टिंग अगर ज्यादा होगी तभी हम पता लगा पाएंगे कि हमारे देश में कोरोनावायरस संक्रमित के कितने मरीज हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात की टेस्टिंग कम करके सरकार सिर्फ आंकड़े छुपा सकती है कोरोनावायरस के मरीजों को नहीं।