मध्यप्रदेश में डॉक्टर दे रहे हैं इस्तीफा , डॉक्टरों ने सुनाई अपनी आपबीती लेकिन सरकार सुनने को राजी नहीं , पढ़ें पूरी खबर

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने कोरोनावायरस काल में ही सरकार तो बना ली लेकिन अब जो डॉक्टर को परेशानियां हो रही हैं उसकी जिम्मेदार कौन होगा भारतीय जनता पार्टी में ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपनी ओर खींच कर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार को गिराकर शिवराज सिंह की सरकार बना ली। लेकिन सरकार बनाने के बाद वहां के डॉक्टर को कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं।

सबसे पहले खराब स्वास्थ्य सुविधाओं से डॉ रश्मि जैन ने डॉ प्रभाकर तिवारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। और मुख्य कारण बताया कि अस्पतालों में स्वास्थ्य को लेकर व्यवस्था बिल्कुल चरमराई हुई है। कोरोनावायरस से लड़ने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में जरूरी सामान नहीं है। और उसके बाद हमारे अस्पतालों में स्टाफ नहीं है जिसकी वजह से हमें बहुत दिक्कत हो रही है।

मध्य प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों की बेहद कमी नजर आ रही है। मरीज ज्यादा है डॉक्टर कम है अस्पतालों में स्टाफ भी कम है और ऊपर से कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जरूरी पर्याप्त सामान डॉक्टरों के पास नहीं है। तो बताइए ऐसी स्थिति में हमारे डॉक्टर कोरोनावायरस की इस लड़ाई को कैसे जीतेंगे। क्योकि सरकार तो आप कोरोनावायरस काल में ही बना लेते हो

हकीकत तो यह है दोस्तों कोरोनावायरस खतरे को लेकर अभी तक हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों को कोई ऐसा भाषण नहीं दिया जिसमें डॉक्टरों की परेशानी का जिक्र हो। बस इतना जरूर किया है कि अस्पतालों पर फूल बरस बा दिए है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाली ताली तो ऐसे बजवाई थी कि देश में डॉक्टरों के पास पर्याप्त सम्मान पहले से ही उपलब्ध है।

लेकिन यहां तो भारतीय जनता पार्टी में 3 महीने पहले कोरोनावायरस काल में अपनी सरकार बनाई। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं और कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त सामान ना होने की वजह से मध्यप्रदेश के जिलों के अस्पतालों में डॉक्टर निराश होकर इस्तीफा दे रहे हैं।