बेंच से जज का नाम हटते ही गुजरात मॉडल फिर से हरा भरा हो गया , लेकिन सच्चाई छुप नहीं सकती , पढ़ें पूरी खबर

गुजरात हाई कोर्ट के जज गुजरात मॉडल के सिविल हॉस्पिटलों की सच्चाई बयां करते हैं तो भारतीय जनता पार्टी को सच्चाई हजम नहीं हो पाई। अभी कुछ दिन पहले गुजरात हाईकोर्ट के जज ने सिविल अस्पतालों की हकीकत बयां की थी और अस्पतालों की हालत कालकोठरी से भी बदतर बताई थी। उसके बाद तो दो रुपए प्रति ट्वीट बिकने वाले सोशल मीडिया पर गुजरात हाई कोर्ट और जज की आलोचना करने लगे।

जब गुजरात हाई कोर्ट के जज ने गुजरात मॉडल के सिविल अस्पतालों को काल कोठरी से बदतर बताया था तब गुजरात सरकार को और अस्पतालों को बेहतर कराने की जरूरत थी बल्कि गुजरात मॉडल डॉक्टरों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए था और अस्पताल में जो भी समस्याएं आ रही थी उन्हें बेहतर करने की जरूरत थी।

लेकिन इन सब आलोचनाओं से बचने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अस्पतालों को बेहतर करने की बजाय सीधा बेंच से ही जज साहब को हटवा दिया। लो हो गए बेहतर अस्पताल। इसके बाद नई बेंच का गठन हुआ और अगली सुनवाई तक गुजरात मॉडल के अस्पताल फिर से बदहाल हो गए अच्छी अच्छी सुविधाएं हो गई। यानी जो सच्चाई बयां करें बस उसको बदल दो अपने आप विकास हो जाएगा।

और इसी गुजरात मॉडल सिविल अस्पताल में एक परिवार के साथ कितना भद्दा मजाक हुआ था। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में देवराम भाई की मृत्यु हो जाती है। उसके बाद परिवार वालों को फोन किया जाता है और परिवार वालों से कहा जाता है कि आप इनका क्रिया कर्म कर ले। अस्पताल में मुंह तक नहीं देखने देते हैं और उसके बाद परिवार क्रिया कर्म कर देता है।

लेकिन इसके बाद उन्हें फोन आता है की देवराम भाई कोरोना वायरस नेगेटिव हैं और आपने जर्नल बोर्ड में ले जाएं। इतना सुनने के बाद परिवार सन्न रह जाता है और परिवार अस्पताल की ओर दौड़ पड़ता है। लेकिन जैसे ही वह अस्पताल पहुंचते हैं उनके साथ एक और मजाक हो जाता है। दरअसल देवराम भाई की मौत हो गई थी और हमारे कॉल सेंटर से आपको गलत जानकारी दे दी गई थी। तो देखा आपने एक परिवार के साथ कितना भद्दा मजाक किया गया था ।