गुजरात हाई कोर्ट ने गुजरात के सिविल अस्पतालों की सच्चाई बयान करने वाले जस्टिस वोरा को बेंच से ही हटा दिया गया , पढ़ें पूरी खबर

गुजरात मॉडल में अभी तक 15572 कोरोना पोजिटिव के आ गए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात को सिर्फ चुनावी प्रचार बनाकर इसका इस्तेमाल किया है। लेकिन हकीकत तो यह है कि गुजरात के सिविल अस्पतालों की हालत बद से बदतर है। कोरोनावायरस मरीजों का इस गुजरात मॉडल में ढंग से इलाज तक नहीं हो पा रहा है। लेकिन टीवी पर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में गुजरात नाम बहुत चर्चित है।

लेकिन जब गुजरात हाईकोर्ट के जज वोरा ने गुजरात के सिविल अस्पतालों के हालातों की सच्चाई बयां की और गुजरात के सिविल अस्पतालों को कालकोठरी से भी बदतर था। और आगे कहा था कि गुजरात के अस्पतालों की हालत बेहद गंभीर है। लेकिन जज वोरा के इस बयान के बाद उन्हें बेंच से हटा दिया गया। यानी ऐसा समझिए कि जो सरकार से सवाल करेगा या सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा। उसे यह सरकार रोकने की कोशिश करेगी। चाहे वह पत्रकार हो या जज हो या किसी और पद का अधिकारी।

लेकिन जब गुजरात हाईकोर्ट ने गुजरात के सिविल अस्पतालों को कालकोठरी से भी बदतर बताया तब गुजरात सरकार को तो इस पर ध्यान देना चाहिए। जिन अस्पतालों की हालत बद से बदतर है उन्हें सुधारना चाहिए। जिन डॉक्टर के पास पीपीई किट्स नहीं है। जरूरत का सामान नहीं है उन डॉक्टर के पास यह सामान पहुंचाते। लेकिन उन्होंने अस्पतालों को ध्यान ना देते हुए सीधे उस जज को ही बेंच से हटा दिया।

गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और इसी गुजरात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नाम को अपनी रैलियों में विज्ञापन के तौर पर इस्तेमाल किया था। लेकिन कोरोनावायरस संकट के बावजूद गुजरात मॉडल की पोल खुल रही है। 22 मई को जस्टिस वोरा गुजरात के सिविल अस्पतालों की हालत कालकोठरी से बद से बदतर बताई थी। और इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होनी थी।

लेकिन गुरुवार को नई बेंच का गठन होता है । इस बेंच में पहली बेंच के दोनों जजों का नाम है लेकिन इस नई बेंच में जस्टिस वोरा का नाम ही नहीं था। ट्वीट के जरिए देखिए 29 मई को गठित नई बेंच की लिस्ट