भारत में कोरोनावायरस का पहला मामला आने के 2 महीने बाद भी उड़ते रहे हवाई जहाज , और होते रहे कार्यक्रम , पढ़े खबर

भारत में कोरोनावायरस का पहला मामला 30 जनवरी को आया था लेकिन उसके बाद भी सरकार ने इस बीमारी को लेकर कोई गौर नहीं किया कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बीमारी को लेकर सरकार से अलर्ट रहने के लिए एक ट्वीट किया। लेकिन ट्वीट करने के बाद भक्तों ने इस नेता का खूब मजाक उड़ाया।

जब भारत में कोरोनावायरस का पहला मामला जनवरी के महीने में आ गया था तब भारत सरकार को चाहिए था कि उसी समय हवाई यात्रा को बंद कर दिया जाए और जितने भी लोग विदेश में हैं अगर वह अपने घर आना चाहते हैं तो उनकी पूर्ण सुरक्षित तरीके से जांच की जाए। और जांच में रिपोर्ट नेगेटिव आने पर ही उन्हें घर भेजा जाता। तो देश में कोरोना वायरस को आसानी से काबू में किया जा सकता था।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ कोरोनावायरस का पहला मामला आने के बाद भी सरकार को कोई मतलब नहीं था । वह राज्यों में सरकार गिराने में व्यस्त थी । उसके बाद विदेश से लोग आते रहे एयरपोर्ट से छुप छुप कर निकलते रहे। और उनकी एयरपोर्ट पर जांच के तौर पर केवल स्क्रीनिंग की गई वह भी बाद में पता चला की स्क्रीनिंग सिर्फ 19 फ़ीसदी लोगों की की गई ।

स्क्रीनिंग से केवल मनुष्य का तापमान पता चलता है ना कि आप कोरोनावायरस के लक्षण पता कर सकते हो अगर किसी व्यक्ति का तापमान अधिक है तब उन्हें रोक लिया जाता था। ऐसे उस समय जांच हो रही थी। इस विदेशी बीमारी से आज पूरा देश परेशान है। अगर उसी समय जांच भरपूर सुरक्षात्मक तरीके से की जाती तो आज देश में कोरोनावायरस इतना नहीं फैला होता और ना ही लॉक डाउन लगाने की जरूरत होती

24 फरवरी तक इटली में 322 मामले कोरोना भारत के आ चुके थे। और भारत देश में 24 फरवरी को बहुत बड़ा कार्यक्रम चल रहा था जिसमें लाखों की भीड़ इकट्ठी की गई थी अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में नमस्ते ट्रंप नामक यह कार्यक्रम लाखों की भीड़ जुटाकर चल रहा था। जिस कार्यक्रम में भारत के लाखों लोगों के साथ विदेशी हजारों लोग शामिल थे लेकिन आज तक मीडिया ने इस मामले को बिल्कुल दबा कर रखा।

अगर भारत में जनवरी के महीने में ही हवाई यात्रा को रोक दिया जाता और इस नमस्ते ट्रंप नामक कार्यक्रम को भी रोक दिया जाता तो आज भारत में इतनी संख्या में कोरोना वायरस नहीं फैल आता। और उसे आसानी से काबू में किया जा सकता था । लॉक डाउन भी लगाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती मजदूर जहां थे वहीं रुके रहते। और जो भी विदेश से आता उसकी भरपूर तरीके से जांच करके उसे घर भेजा जाता। तब हम कोरोनावायरस पर आसानी से काबू पा सकते थे।