अब इससे ज्यादा और क्या देखोगे गोदी मीडिया चैनल पर , टीआरपी के लिए कुछ भी करोगे , जरूर पढ़ें यह खबर

गोदी मीडिया में अब इससे ज्यादा और क्या देखा जाएगा कि पत्रकार एक व्यक्ति से सवाल पूछता है और वह आदमी उससे तू तड़ाक के बात करता है। लेकिन फिर भी वह पत्रकार यानी दीपक चौरसिया उसे लगातार अपने कार्यक्रम में शामिल करते हैं। और वह व्यक्ति यह भी कहता है कि अगर मैं चला गया तो तेरा नुकसान हो जाएगा। और गौर करने वाली बात यह है कि वह पत्रकार हंसी खुशी बैठा हुआ है सुन रहा है उस व्यक्ति को।

पहले गोदी मीडिया ने लगातार हिंदू-मुस्लिम किया जब जनता हिंदू मुस्लिम देख देख कर पक गई और बेसहारा और लाचार मजदूरों के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे तब इन्होंने एक नया काम शुरू कर दिया कि जो मुसलमानों को बिठा दो और डिबेट कराओ। और दोनों मुसलमान एक विचारधारा के नहीं है वह अलग अलग विचारधारा के हैं।

तारेक फतेह को तो आप जानते ही होंगे। पाकिस्तान से आए हैं और गोदी मीडिया की नजर में सबसे बड़े देश भक्त हैं वो । यानी जिस मुसलमान ने इस हिंदुस्तान में जन्म लिया है वह गोदी मीडिया की नजर में देशभक्त नहीं है जो पाकिस्तान से आया है वह देश भक्त है। और इस तारिक फतेह को अक्सर डिबेट में बुलाया जाता है। और इसे डिबेट में इसलिए बुलाया जाता है क्योंकि यह हिंदुस्तान के मुसलमानों को लगातार टारगेट करता है।

पहले जब कोरोनावायरस के मामले इस देश में बढ़ रहे थे। तब गोदी मीडिया के चैनलों पर इनको लेकर डिबेट चल रही थी यानी एक तरफ यह तारिक फतेह और दूसरी तरफ वह मौलाना जो 5-5 हज़ार लेकर डिबेट में पहुंच जाते हैं। और इसके बाद होने दो डिबेट लड़ने दो आपस में। जनता के मुद्दे तो पहले से ही गायब थे। मजदूर सड़कों पर अपनी जान दे रहे हैं उन्हें आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

अब इससे ज्यादा गोदी मीडिया के चैनलों में आप क्या देखेंगे वह व्यक्ति लगातार पत्रकार से तू तड़ाक करके बोल रहा है। लेकिन फिर भी यह पत्रकार उसे अपने कार्यक्रम में शामिल किए हुए क्योंकि हुए हैं क्योंकि उस व्यक्ति के भी है तो चाहने वाले जो इस कार्यक्रम को देख रहे हैं। लेकिन उस व्यक्ति ने इस पत्रकार से दो बातें कही थी पहली बात यह थी कि देश में इतना कुछ हो गया और तुमने अपनी सरकार से कभी सवाल किया है ।

दूसरी बात उस व्यक्ति ने यह कही थी कि मजदूरों की सड़कों पर जाने जा रही हैं। लोग तो पैदल चलकर अपने घर पहुंच रहे हैं। भूख प्यास तपती सड़कों पर नंगे पांव गरीब मजदूर पैदल चलकर अपने घर की ओर जा रहे हैं। लेकिन तुम्हें नींद कैसे आ जाती है। इस पर वो पत्रकार कहता है कि मैं आराम से सोता हूं मुझे बहुत बढ़िया नींद आती है।

आपको एक बात बताएं अपने मन को स्वस्थ रखना है तो इन डिबेट्स को देखना बंद कर दें। क्योंकि इन डिबेट में चीख-पुकार के सिवा कुछ भी नहीं है। अगर यह डिबेट आप घर में देख रहे हो तो आपके साथ आपके बच्चे भी इनकी डिबेट को देखते होंगे तो उनके दिमाग पर क्या असर पड़ता होगा।