हिमाचल प्रदेश में पत्रकारों द्वारा प्रवासी मजदूरों की समस्या को लेकर रिपोर्टिंग करने पर ,पत्रकारों पर दर्ज करा दी एफआईआर

हिमाचल प्रदेश में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर यह पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे थे और प्रवासी मजदूरों पर रिपोर्टिंग करने के आरोप में इन पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज करा दी गई है। इनका गुनाह सिर्फ इतना था कि इन्होंने मजदूरों की समस्याओं को सरकार के सामने लाना चाहा। पिन प्रवासी मजदूरों की आवाज को उठाना चाहा लेकिन बदले में इन पत्रकारों को यह फल मिला।

देश में कोरोनावायरस लगातार तेजी गति से फैल रहा है और इस कोरोनावायरस के चलते हुए मजदूरों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है वह आप देख ही सकते हैं सोशल मीडिया पर बहुत सारे वीडियो ऐसे हैं जो मजदूर पैदल चल रहे हैं इसमें गर्भवती महिलाएं भी हैं जो पैदल अपने घर की ओर जा रही हैं

लेकिन कोई इन मजदूरों की सुनने वाला नहीं आज जब यह पत्रकार सरकार से सवाल पूछ रहे हैं इन गरीबों की आवाज सरकार तक पहुंचा रहे हैं तब सरकार इन पत्रकारों की आवाज हमेशा के लिए बंद करना चाहती है। जो लोग कहते थे प्रेस की आजादी पर हमला है आज इस रिपोर्ट के मुताबिक दावे के साथ कहा जा सकता है कि प्रेस की आजादी पर हमला है

क्योंकि इसमें प्रेस के पत्रकारों के साथ साथ गरीबों की आवाज को भी दबाया जा रहा है। आप ने पिछले दिनों देखा ही होगा कि गरीबों के साथ कैसा बर्ताव हुआ था। सड़कों पर जहां रहे थे तो पुलिस मारकर पुलिस भगा रही थी रेल की पटरियों के सहारे घर लौट रहे थे फिर वहां भी पुलिस मिलने लगी। मुझे मजदूरों ने सोचा कि रेल की पटरी ऊपर थोड़ा आराम कर ले तो वहां भी उन्हें अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा।

इन पत्रकारों का सिर्फ इतना कसूर था कि उन्होंने गरीबों की आवाज को उठाना चाहा। दिव्य हिमाचल अखबार के रिपोर्टर ओम शर्मा के खिलाफ तीन एफ आई आर दर्ज हो चुकी हैं। इनका कसूर बस इतना था कि इन्होंने जो वहां प्रवासी मजदूर प्रदर्शन कर रहे थे इन्होंने उन मजदूरों का सोशल मीडिया के जरिए लाइव प्रसारण दिखा दिया था।

और भी कई पत्रकार हैं , जगत बैंस , अश्वनी सैनी , विशाल आनंद , पंजाब केसरी के सोमदीव शर्मा , इन सभी पत्रकारों का जुर्म सिर्फ इतना था कि इन्होंने गरीब मजदूरों की आवाज को उठाना चाहा और वहां की सरकार ने इनकी आवाज को बिल्कुल दबा दिया इन पत्रकारों पर लगातार 14 एफआईआर किए गए। आज जब गरीब मजदूर सड़कों पर चल रहे हैं और उनकी आवाज उठाने के लिए सरकार रोक रही है सचमुच यही प्रेस की आजादी पर हमला है।