शहरों ने रूह उतार फेंकी है सुनिए यह कविता

जहां पहले बाजारों में भीड़ सजती थी बच्चे माता-पिता के साथ उनकी उंगली पकड़कर बाजार जाते थे आज वह कुर्सियां भी उदास हैं कि ना जाने इंसान कौन सी धरती पर चला गया छोटे-छोटे बच्चे जो अभी नासमझ है जो बाहर जाते थे वह हम सोच रहे होंगे कि ना जाने कौन सी बला आ गई है और हमें घर से निकलने नहीं दिया जा रहा है जो बच्चे स्कूल जाते थे और अभी इस बीमारी से स्कूल सब बंद हैं और उन्हें छुट्टियां मिल गई हैं उनके दिलों में खुशियां हैं लेकिन इन खुशियों को कहां साझा किया जाए यह वह बच्चे यह बात नहीं समझ पा रहे हैं। शहरों में निकल जाओ तो सड़कों पर कोई दिखता नहीं है दिखता है तो सिर्फ लाचार परेशान। सड़कों पर वही लोग फिर रहे हैं जो परेशान हैं खाने पीने के लिए रुपए पैसे के लिए।

जो अमीर लोग हैं उन्हें कोई परेशानी नहीं है परेशान हो है इसकी दुकान पिछले 1 महीने से बंद है और वह सोच रहा है कि 1 महीने का किराया बिल्कुल फ्री में जाएगा काश ऐसा कोई नियम होता कि प्रकृति कि कोई आपदा या बीमारी आएगी तो यह किराया नहीं लिया जाएगा लेकिन लॉक डाउन तो जरूरी है वरना यह रोग और फैल सकता है हमें अपने घरों में ही रहने की जरूरत है वरना यह रोग कहां तक चलेगा कोई नहीं जान सकता। इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी है घर पर निकले तो माफ का प्रयोग करें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें किसी नए व्यक्ति से 1 मीटर दूर रहने की कोशिश करें।

हमारे भारत के किसान भाइयों की फसल कटने का वक्त आ गया है और फसलें भी काटी जा रही हैं लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग दूरी भी बनाई जा रही है क्योंकि हमारे देश में अनाज बहुत जरूरी है क्योंकि हम किसी भी महामारी का सामना कर सकते हैं अगर हमारे पर्याप्त मात्रा में अनाज है गांव में अनाज की कोई कमी नहीं होती है यहां लोग यह एक महीना क्या पूरी 1 साल बिता देंगे सबसे ज्यादा फर्क उन लोगों पर पड़ेगा जो दिहाड़ी मजदूर हैं शहर में रहते हैं उनके सामने कई परेशानियां हैं जैसे समय पर बिजली का बिल पानी का बिल आदि भरना पड़ता है सब्जियां भी महंगी मिलती हैं और परिवार में जब सभी लोग काम करते हैं तभी उनका परिवार चल पाता है लेकिन लॉक डाउन में घरों में रह रहे हैं और इस कठिनाई का सामना कर रहे हैं।

यूट्यूब पर यह कविता मिली हमने सोचा यह कविता आपके साथ शेयर किया जाए इस कविता का टाइटल है क्या शहरों ने रूह उतार फेंकी है इस कविता को फोजिया अर्शी नाम की किसी महिला ने लिखा है हम चाहते हैं कि आप भी यह कविता सुने और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।