वीडियो : गर्भवती पत्नी के लिए रास्ते में लकड़ी से बनाई गाड़ी , 800 किलोमीटर दूर से खींच लाया अपने परिवार को मजदूर

जब से भारत में लॉक डाउन लगा है तब से मजदूरों की अलग-अलग तस्वीरें सोशल मीडिया से आ रही हैं ऐसी ही एक तस्वीर आई है जब एक मजदूर अपने परिवार को लेकर अपने घर लौट रहा था तब उसकी पत्नी को पैदल चलने में दिक्कत होने लगी। क्योंकि वह गर्भवती थी। और वह सड़कों पर पैदल बच्चे को लेकर नहीं चल पा रही थी। तभी रास्ते में ही मजदूर ने लकड़ी की गाड़ी बना ली।

आपको बता दें यह मजदूर हैदराबाद में नौकरी करता था और यह वहां से अपने घर को पैदल निकल गया मजदूर अपनी पत्नी के साथ और 2 साल की बेटी को लेकर घर की ओर पैदल निकल पड़ा रास्ते में पैदल चलने में गर्भवती पत्नी को तकलीफ होने लगी। फिर इस मजदूर ने 2 साल की बेटी को गोद में लेकर चलने लगा लेकिन खाली पेट गर्भवती पत्नी को भी नहीं चल मिल रहा था।

पैदल चलने में आम इंसान को भी दिक्कत होती है लेकिन वह तो फिर भी गर्भवती पत्नी ठहरी। मजदूर ने 2 साल की बेटी को अपनी गोद में ले लिया और आगे आगे चलने लगा जब उसकी गर्भवती पत्नी को ज्यादा दिक्कत होने लगी और सफर भी बहुत लंबा था तब उसने मांस के टुकड़े इकट्ठे करके लकड़ी से एक गाड़ी बना ली। उस मजदूर नहीं है गाड़ी इतनी बड़ी बनाई थी कि उसमें उसकी पत्नी और बच्चे को बिठाया जा सकता था और थोड़ा बहुत सामान भी आ जाता।

यह मजदूर अपने घर बालाघाट की ओर बढ़ने लगा एक रास्ते से अपने परिवार को घर की ओर खींचने लगा गर्भवती पत्नी ने 2 साल की बच्ची को अपनी गोद में बिठा लिया तथा इसमें परिवार की गाड़ी को अपने घर की ओर खींचता रहा 800 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद यह परिवार अपने घर पहुंच तो गया।

लेकिन इसको क्या क्या दिक्कत हुई वह भी सुनिए जिस मजदूर ने अपनी पत्नी के लिए गाड़ी बनाई थी इस मजदूर का नाम रामू है और उसकी 2 साल की बेटी है अनुरागिनी। यह मजदूर अपने परिवार को लेकर दिन-रात पैदल चला है। इस परिवार को कई पुलिस चौकियों पर रोका भी गया था। इस गरीब मजदूर के परिवार ने 17 दिन का सफर तय करके अपने घर पहुंचा यह मजदूर तपती सड़कों पर अपने परिवार को साथ लेकर पैदल चलता रहा।

जब यह मजदूर लकड़ी की गाड़ी लेकर एक हाईवे से होकर गुजरता है वहां पुलिस के कुछ जवान खड़े होते हैं और इस परिवार को देखते हैं तो एक जवान ने बच्ची के पैरों तरफ निगाह डाली तब बच्ची के पैरों में चप्पल नहीं थी उस जवान को यह देखा नहीं गया उसने जल्द ही उस बच्ची के चप्पलों का इंतजाम किया और खाने-पीने का इंतजाम भी किया। तब उसी पुलिस के जवान ने इस मजदूर के परिवार को घर भेजने के लिए एक गाड़ी का इंतजाम किया तब इस मजदूर का परिवार घर पहुंच पाया।