लॉक डाउन में नहीं रुक रहे हैं कोरोनावायरस संक्रमित के मामले

जब भारत में लोग डाउन लागू किया गया था तब से 300- 400 मरीज थे लेकिन अब यह संख्या 6000 से ऊपर चली गई है। जनसत्ता ने अपनी वेबसाइट पर एक ग्राफ अपलोड किया है जिसमें बताया गया है कि भारत और इटली में स्थिति एक जैसी है लेकिन भारत एक महीना पीछे है क्योंकि इटली ने कोरोनावायरस की मरीज का ग्राफ 1 महीने पहले का और भारत के वर्तमान कोरोनावायरस का ग्राफ बिल्कुल बराबर है फर्क सिर्फ इतना है कि भारत और इटली का ग्राफ में 1 महीने का फर्क है इटली में आप जानते ही हैं कि स्थिति कितनी खराब है सबसे ज्यादा कोरोनावायरस से मौतें हुई हैं लोगों के पूरे पूरे घर पर खानदान खत्म हो गए हैं डॉक्टर लोग परेशान हैं वह ईश्वर को याद कर रहे हैं कि किसी तरीके से इस बीमारी को भगाया जा सके इससे छुटकारा पा सके वहां लैब में हर तरीके एंटी डॉट लिए लेकिन इस वायरस से छुटकारा नहीं मिल पाया है । इटली की जनता बहुत डरी हुई है और लगातार कोरोनावायरस के मामले पाए जा रहे हैं इतनी महामारी के बीच भी वहां जा चुका सिलसिला नहीं रुक रहा है उन लोगों ने लगातार जांच की हैं और जिन लोगों को कोरोनावायरस लक्षण पाए गए हैं उसको क्वॉरेंटाइन किया गया है। और वहां लोग जागरूक भी हैं और जांच के लिए आगे आ भी रहे हैं इतनी मौतों के बाद लोग वहां जागरूक हैं और अगर किसी में लक्षण पाए जाते हैं तो वहां खुद को अलग कर लेते हैं और फिर उसकी जांच कराई जाती है लोग अपने घरों में बिल्कुल बंद है।

हमारे देश में कई राजनीतिक पार्टियों और कई बड़े लोग यह सवाल सरकार पर उठा रहे हैं कि सरकार को ज्यादा से ज्यादा जांच करनी चाहिए जो लोग बाहर से काम करके गांव लौटे हैं उस गांव की जानकारी जुटाने चाहिए और जो लोग बाहर से आए हैं उनकी जांच करनी चाहिए तब हम इस रोग से बस सकते हैं और सरकार को चाहिए कि वे अधिक से अधिक जांच करें जितना हो सके उतना जांच कराएं क्योंकि सवाल यह है अभी तक जिन लोगों ने यही सवाल उठाया है कि हमारे भारत में जांच कम हो रहे हैं और इसके परिणाम गंभीर होंगे क्योंकि जब जांच नहीं ही नहीं हो रही है तो कैसे पता कर लोगे कि कौन कोरोनावायरस संक्रमित मरीज है और कौन नहीं । सोशल मीडिया पर कई लोग अपने अकाउंट से यह आवाज उठा रहे हैं कि जांच ज्यादा से ज्यादा होनी चाहिए और कोरोनावायरस के जो मरीज हैं उनका जल्द से जल्द इलाज होना चाहिए उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत है क्योंकि ना जाने कितने लोग संक्रमित करेंगे और इससे जिस इलाके में वो रहेंगे उसे हॉटस्पॉट बना देंगे इसलिए जितनी ज्यादा जांच होगी उतनी ज्यादा हम सतर्क और सुरक्षित रह सकते हैं ।

एक खबर के मुताबिक गांव वालों ने जो बाहर से लोग आए उनका डाटा इकट्ठा किया और अपने एसडीएम को दिया उस लेटर में यह कहा गया था कि लोग बाहर से आए हैं और उनकी जांच करानी चाहिए उस लेटर में लोगों के नाम उनकी उम्र उनके पिता का नाम कहां से आए हैं सब डाटा एसडीएम को दिया लेकिन फिर भी जांच नहीं हुई फिर बाद में उस व्यक्ति के पास फोन आता है और उसे कहा जाता है कि अगर किसी को लक्षण दिखे तो वह बताएं तब हम सिर्फ उसकी जांच कर लेंगे और आप को ध्यान रखना होगा अगर किसी में यह लक्षण दिखाई दे तो आप हमें तुरंत फोन करें हम सिर्फ उसकी ही जांच करेंगे। लेकिन एक सवाल है कि अगर जांचे नहीं होंगी तो कैसे पता लगेगा कि कौन कोरोनावायरस संक्रमित मरीज है और कौन नहीं यह जो सोशल मीडिया पर यह तमाम लोग जो आवाज उठा रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा जांच हो तो यह क्यों उठा रहे हैं वो पागल नहीं है क्योंकि जितने जाचे होंगी उतने को रोना संक्रमित आमले सामने आएंगे तो फिर हमें उन मामलों को उपचार करने की जरूरत होगी