लॉक डाउन के 5 हफ्ते गुजर गए , लेकिन मोदी सरकार की तैयारी बिल्कुल कमजोर , पढ़ें यह रिपोर्ट

जब भारत में पुराना वायरस का पहला केस आया था प्रधानमंत्री उसके बाद भी नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम करने में जुटे हुए थे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 मार्च को पूरे देश में लोग डाउन की घोषणा करते हैं उसके बाद जो मजदूर दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे होते हैं वह वहीं के वहीं ही फंस जाते है । आज सवाल यह है आपको लॉक डाउन करें हुए 5 हफ्ते का समय हो गया है और आपने इस कोरोनावायरस से लड़ने के लिए क्या तैयारी की है।

आज जब 5 हफ्ते हो गए हैं तब इन मजदूरों को सरकार घर भेज रही है लेकिन अगर यही काम पहला लॉक डाउनलोड ने के बाद किया जाता तो यह गरीब कुछ ना कुछ अपने घर पैसे लेकर जरूर जाता जिससे अपना परिवार थोड़े दिन गुजर बसर कर लेता लेकिन अब जब बिल्कुल परेशान मजबूर हो गया है फिर आप उसको अब घर भेज रहे हैं तो ऐसे में मैं अपने घर क्या लेकर जाएगा। लेकिन मोदी सरकार चाहती तो इन मजदूरों को उसी वक्त जांच करके इन्हें घर भेज देती लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ बल्कि उन्हें 5 हफ्ते तक रोका गया आज 5 हफ्ते बाद जब इन्हें अपने घरों पर भेजा जा रहा है तो इनकी सही तरीके से टेस्टिंग भी नहीं की जा रही है मजदूरों का केवल तापमान चेक किया जा रहा है।

ICMR ने जो टेस्टिंग किट चाइना से मंगाई थी। उन टेस्टिंग किट्स में कमियां आई। इसके बाद ICMR ने सभी राज्य सरकारों को यह संदेश दिया कि इन फीट्स में समस्या आ रही है और जांच के लिए इनका प्रयोग ना करें। अब इसके बाद जो गांव वाला अपने गांव में जा रहा है उसकी सही तरीके से टेस्टिंग नहीं हो पा रही है लेकिन अगर वह गांव वाला अपने गांव में कोरोनावायरस संक्रमण लेकर जाता है तो आप समझ सकते हैं कि कितने लोगों को संक्रमित करेगा और गांव में स्वास्थ्य को लेकर कैसे हालात हैं यह आप सब लोग जानते हैं। जब भी कोई गांव वाला अपने गांव लौट रहा है तो उसकी सही तरीके से इस टेस्ट में नहीं हो रही है बल्कि उसका सिर्फ तापमान नापा जा रहा है। आपको बता दें कि सिर्फ तापमान मापने से कोरोनावायरस का लक्षण नहीं पता चल पाएगा।

अभी कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि जो भी व्यक्ति गांव जा रहे है । उसमें 10 में से 3 लोग लोग कोरोनावायरस संक्रमित गांव जा रहे हैं।

इसके बाद आगरा के क्वॉरेंटाइन सेंटर से जो तस्वीरें आई थी वह बेहद चौंकाने वाली थी क्योंकि आगरा के क्वॉरेंटाइन सेंटर में लोगों को खाना ऐसे दिया जा रहा था कि जैसे वह कोई इंसान नहीं जानवर हैं। लेकिन इन तस्वीरों पर गोदी मीडिया में कोई सवाल नहीं किया क्योंकि यह तस्वीर उत्तर प्रदेश की तस्वीरें थी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है इसलिए गोदी मीडिया कोई सवाल नहीं कर सकता है।

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक मुंबई से 7 मजदूर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आए और सातो लोग कोरोनावायरस संक्रमित पाए गए । यह है कि मोदी सरकार ने इन मजदूरों को कोरोनावायरस संक्रमण जैसी बीमारी से बचाने के लिए क्या तैयारियां की हैं क्या यह सवाल पूछा जाना नहीं चाहिए।

अब बात आती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे ऐसे प्रधानमंत्री हैं इन्हें तो बस इवेंट करना आता है आप भीड़ इकट्ठा करके इनसे भाषण सुन लीजिए बस। जब पहला और दूसरा लॉक डाउन लगा तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर आकर राष्ट्र को संदेश दिया दूसरी बार भी ज ब्लॉक डाउन लगा तब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीवी पर आकर राष्ट्र को संदेश दिया और जब आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के गरीब मजदूरों को कोरोनावायरस जैसी संक्रमण बीमारी से बचाने में उनकी सरकार फेल साबित हुई तो इस बार टीवी पर बिना आय लॉक डाउन का समय बढ़ा दिया गया है।

अब एक अफवाह उड़ी थी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रविवार को ताली और थाली बजाई जाए जब यह बात सोशल मीडिया पर फैली और रविवार को थाली ओ ताली का प्रोग्राम करने की लोग चर्चाएं कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस प्रोग्राम के बारे में पता चला तब उन्होंने ट्वीट करके कहा यह अफवाह है।

तो आखिरकार सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पिछले 5 हफ्तों से क्या कर रही थी और प्रधानमंत्री पीएम केयर फंड में जो पैसा जनता ने गरीब मजदूरों और देश में इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए योगदान दिया है। वह कहां और कैसे खर्च होगा इसे कोई नहीं जानता और ना ही उस पर कोई सरकार ऑडिट कर सकती है।