रेलगाड़ियां तो आज से चल जाएंगी , लेकिन अब गरीब मजदूरों के सामने आ रही है बड़ी समस्या , पढ़ें यह रिपोर्ट

आज से देश में सरकार ने ट्रेन चलाने का फैसला लिया है लेकिन ट्रेन में सफर करने से पहले आपको उसकी ऑनलाइन बुकिंग करना पड़ेगी क्योंकि रेल विभाग ने किसी दफ्तर को नहीं खोला है स्टेशन पर कोई टिकट मास्टर भी नहीं है बस आपको अगर ट्रेन में अपने घर लौटना है तो आपको ऑनलाइन टिकट बुक करना होगा। ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद फिर आप सफर कर सकते हो।

कोरोनावायरस संक्रमित के मरीज देश में लगातार बढ़ रहे हैं जब से शराब बिकी है तब से कोरोनावायरस के मरीज और ज्यादा संख्या में बढ़ रहे हैं देश में इस वक्त कोरोना मरीजों की संख्या 70 हजार पार कर चुकी है। और अभी तक दो हजार से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं। दूसरे राज्यों में काम कर रहे प्रवासी मजदूर अपने घर आने के लिए लॉक डाउन में पहले तो लॉक डाउन खुलने का इंतजार करते रहे कुछ लोग बीच में ही पैदल अपने घर को अपने परिवार के साथ सामान बांध कर निकल गए

सरकार ने 12 मई से ट्रेन चलाने का फैसला लिया लेकिन उससे भी बड़ा फैसला ले लिया कि 11 मई शाम 4 बजे से टिकट की ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। स्टेशन पर टिकट नहीं बेचा जाएगा लेकिन जैसे ही 4 बजे वैसे ही टिकट जोरों शोरों इंटरनेट पर बुक होने लगा । जिन मजदूरों के पास या जिन मजदूरों के बच्चों के पास मोबाइल फोन था या जो इंटरनेट के बारे में जानते थे उन्होंने तो टिकट बुक करने की कोशिश की और टिकट बुक हुआ या नहीं हुआ बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि एकदम ट्रैफिक आने की वजह से सरवर पर प्रॉब्लम होने लगी।

सरवर पर एक साथ जब ज्यादा लोग आए तो सरवर ने काम करना बंद कर दिया यानी कुछ लोगों की ट्रेन टिकट बुक हुई और कुछ लोगों की नहीं लेकिन सवाल यह है कि गरीब मजदूरों की टिकट बुक कैसे होगी न जिनके पास न एंड्रोइड फोन है ना इंटरनेट की सुविधा है ना इंटरनेट चलाने के बारे में जानते हैं उन्हें क्या मालूम कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट होती क्या है। ऐसे रजिस्ट्रेशन होगा क्या स्लिप मिलेगी कैसे पैसा कटेगा।

रेलगाड़ी के आसपास कहीं कोई ऐसा दफ्तर खुला होता कि जिसमें पैसा देकर गरीब मजदूर टिकट ले सकते । लेकिन ऐसा कोई भी रेलवे स्टेशन पर दफ्तर नहीं है कि जिस पर करीब मजदूर जाकर अपने घर के स्टेशन का टिकट ले सके। कुछ मजदूर साइबर कैफे की दुकानों पर भी गए साइबर कैफे की दुकानें लॉक डाउन की वजह से छुप छुप कर काम कर रही थी लेकिन उनका भी सरवर काम नहीं कर रहा था।

जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन हो गया है और जिन लोगों ने ऑनलाइन टिकट बुक कर लिया है वह रेलगाड़ी में आराम से सफर करेंगे। लेकिन गरीब मजदूर कैसे सफर कर पाएगा। क्योंकि मजदूर वर्ग के जो लोग हैं उन्हें इंटरनेट चलाना नहीं आता है कि वह ट्रेन के टिकट ऑनलाइन बुक कर सके। आखिरकार रेलगाड़ियां तो चली लेकिन गरीब मजदूरों के सामने फिर परेशानी बन कर खड़ी हो गई कि वह ट्रेन का टिकट बुक करे तो करे कैसे। पीएम केयर फंड में इतनी बड़ी बड़ी रकम लोगों ने दान दी लेकिन फिर भी उस फंड से इन गरीब मजदूरों को सरकार फ्री नहीं पहुंचा सकी