मुंबई से पैदल निकला मजदूर, रास्ते में भूख से तोड़ा दम

38 वर्षीय के मध्य प्रदेश के सीधी जिले के रहने वाले मजदूर मोतीलाल साहू मुंबई में काम करने गए थे मुंबई में मोतीलाल साहू हाउस पेंटिंग का काम करते थे जब देश में पहला लॉक डाउन हुआ तो यह भी वहीं फस गए उसके बाद इन्होंने सोचा कि 14 अप्रैल को जब लॉक डाउन खुलेगा तब यह अपने घर लौट जाएंगे । 25 मार्च के बाद काम बंद हो जाने पर जितना धन कमाया था वह सब खर्च होने लगा । मोतीलाल साहू यह आस लगाए बैठे थे कि 14 तारीख के बाद जब ट्रेने चलेंगी तो वह अपने घर लौट जाएंगे। जितना धन कमाया था वह 21 दिन में खर्च हो गया अब मोतीलाल साहू को समय काटना मुंबई में बहुत मुश्किल हो रहा था फिर उन्होंने किसी भी तरीके से घर लौटने का मन बना लिया और वह मुंबई में ही 50 लोगों के समूह के साथ घर लौट पड़े।

इस समूह में 9 लोग मध्यप्रदेश के थे । कल्याण पुलिस स्टेशन के एसआई कमलाकर ने अपने बयान में कहा कि मोतीलाल साहू 22 अप्रैल को नेरुल से पैदल चले थे। इनके साथ कई और मजदूर भी थे जिनके पास मोबाइल थे और जीपीएस सिस्टम के सहारे पैदल चल रहे थे। पूरी रात पैदल चलने के बाद सुबह 8 बजे यह लोग खदावली गांव में पहुंचते हैं जहां यह मजदूरों का ग्रुप कई घंटों तक रुका रहता है।मोतीलाल साहू खाली पेट थे और मोतीलाल साहू को रास्ते में कहीं खाना नहीं मिल पाया । इसके बाद मोतीलाल साहू की हालत बिगड़ने लगी । हालत बिगड़ने के बाद समूह के लोगों ने 108 एंबुलेंस पर फोन किया। फोन करने के बाद समूह के लोग मोतीलाल साहू को छोड़कर आगे बढ़ गए।

समूह के सभी लोग चले गए लेकिन उनके पड़ोसी गांव के सुरेश साहू उनके पास ही रुके रहे। आपको बता दें कि यह लोग पुलिस से बचने के लिए कच्चे रास्ते पर चल रहे थे। 24 घंटे से भी ज्यादा खाना नहीं मिलने पर इनकी हालत बिगड़ गई और यह बेहोश होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े उनके चचेरे भाई ने बताया कि जब इनकी तबीयत बिगड़ी तो इन्हें हॉस्पिटल ले जाने लगे लेकिन हॉस्पिटल ढूंढने में काफी समय लग गया जिसके कारण कल साहू की मौत हो गई ।