भारत में अगर लॉक डाउन की सीमा बढ़ी तो बढ़ सकती हैं मजदूरों की मुसीबतें पढ़ें रिपोर्ट में…

जब जनता कर्फ्यू लगा था तब ही से मजदूर वर्ग के लोग सभी मुसीबतों में आ गए हैं और जब बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में संदेश दिया कि पूरे देश में लॉक डाउन किया जाता है और लोग अपने घर से ना निकले तब मजदूर वर्ग के लोग अपना सामान बांधकर घर की ओर चल पड़े यह वह मजदूर थे जो एक वक्त का खाना खा ले तो दूसरे वक्त का पता नहीं अपने मालिक का इन्हें भरोसा नहीं कि पैसा दे या ना दे तो इन्होंने उस वक्त इन्हें घर लौटना सबसे बेहतर लगा और यह सभी लोग अपने-अपने घर लौटने लगे रास्ते में कुछ लोगों ने खाने-पीने का इंतजाम भी किया जिनसे इनकी परेशानी कम हो गई और यह अपने घर आराम से लौट गए कोई 4 दिन में पहुंचा तो कोई 5 दिन में पहुंचा है लेकिन घर आपने अपने सभी लोग पहुंच गए लेकिन अभी बहुत लोग शहरों में फंसे हुए हैं और उन्हें इसी बात का अंदाजा था कि 21 दिन बाद हो सकता है लॉक खुल जाए और हम अपने घर लौट सकें अभी 5 दिन पहले रेलवे ने ऐलान किया कि रेलवे जल्द ही अपना यातायात सिस्टम शुरू कर रहा है और अपने कर्मचारियों को काम पर आने का ऐलान कर दिया टिकट भी बुक होने लगी और हवाई यात्रा भी शुरू होने वाली थी लेकिन हवाई यात्रा को 30 अप्रैल तक रोक दिया गया उसके बाद रेलवे ने बताया कि हमने सभी अपनी तैयारी कर ली हैं और हमने अपने कर्मचारियों को काम पर लौटने को ऐलान कर दिया है अब केंद्र सरकार के हाथ में है कि इसे हरी झंडी देती है या नहीं लेकिन कल एक रिपोर्ट सामने आती है कि रेलवे 15 अप्रैल से रेलवे नहीं चलाएगी और जिन लोगों ने टिकट बुक कर रखे हैं वह अपना पैसा वापस करेगी इसे सीधा संकेत यह जाता है कि लॉक डाउन को बढ़ाया जाएगा । ऐसा नहीं है कि 21 दिन लॉक डाउन करने के बाद कोरोना खत्म हो गया हो जब भारत में लॉक डाउन हुआ था तब सिर्फ 300 के थे लेकिन आज 5000 से ऊपर कोरोना मरीज संक्रमित हो गए हैं। आपने देखा ही होगा जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसे चलवाई थी तब वहां लगभग 1 लाख यात्री दिखाई दिए थे काफी भीड़ दिखाई दे रही थी और सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए लोग नहीं दिखाई दे रहे थे सभी घर लौटने की जल्दी में थे कि किसी तरीके से बस में सीट मिल जाए और घर तक बैठ जाएं लेकिन सवाल यह है जिन लोगों के पास खाने-पीने का सामान नहीं था जो लोग परेशान थे वे लोग तो पैदल ही चले आए लेकिन जो लोग इस सोच में फंसे हुए हैं कि 14 तारीख के बाद जब लॉक डाउन खत्म होगा तब हम अपने घर को लौट जाएंगे लेकिन अगर लॉक डाउन की समय सीमा बढ़ जाती है तब ऐसे में क्या होगा क्या बे भी अपने घर को निकल पड़ेंगे

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आने वाले दिनों में भारत में गरीबी में 40 करोड़ मज़दूर फस सकते हैं जिसमें से 20 करोड़ लोगों की नौकरी भी जा सकती है यह बहुत ही चिंताजनक रिपोर्ट है हमारा देश पहले ही अर्थव्यवस्थाओं से जूझ रहा थ 20 करोड़ लोगों की नौकरी भी जा सकती है यह बहुत ही चिंताजनक रिपोर्ट है हमारा देश की पहले से ही अर्थव्यवस्था चरमराई हुई थी युवाओं के पास नौकरी नहीं थी लेकिन जब यह भारत में महामारी आई है तो आप सोच सकते हैं कि हालात इतने गंभीर पूर्ण होंगे संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 20 करोड़ लोगों की नौकरी जा सकती है हमारे देश का युवा पहले से ही परेशान था अपनी नौकरी को लेकर लेकिन जब ऐसे समय से उसे गुजरना पड़ेगा तो क्या होगा । पिछले 6 सालों में गोदी मीडिया ने सत्ता से युवाओं की नौकरी पर कोई सवाल नहीं किया क्योंकि अब तक रिवाज बन गया है आपको मौजूदा सत्ता की वाहवाही करनी है सवालों को छुपाना है तब आप टिके रहोगे।

तबलीगी जमात का जब से मामला सामने आया मीडिया दिन रात हिंदू-मुस्लिम करने में लग गया और उसने इतनी कोशिश की प्राइमटाइम अपने दिन के शो में सभी में उसने तबलीगी जमात के सहारे देश के मुसलमानों को टारगेट करना शुरू कर दिया करो ना पर जो डॉक्टर परेशान थे उस पर सवाल नहीं किए सरकार से जो परेशानियां मजदूर के सामने आ रही हैं उनका जिक्र नहीं किया सवाल नहीं किए सत्ता से बस सब लोग सरकार की वाहवाही में लग गए मीडिया में जब तबलीगी जमात का मामला शांत होता दिखा तो अब तबलीगी जमात को पाकिस्तान से जोड़ दिया गया और आप जानते ही हैं कि जब पाकिस्तान से किसी मुद्दे को जोड़ा जाता है तो जो भक्त गढ़ है वो कितना खुश होता है आप जानते ही होंगे। खुशी इस बात से नहीं है खुशी तो तब होगी जो हमारे डॉक्टर लोगों के पास जो व्यवस्थाएं नहीं है उनके पास सभी विशेषताएं होनी चाहिए अधिक से अधिक स्वास्थ्य की सेवाएं होनी चाहिए तब हम इस कोरोना बीमारी से लड़ सकते हैं ना कि मीडिया पर हिंदू मुस्लिम का मुद्दा चला कर।