बिना तैयारी के नोटबंदी और बिना तैयारी के तालाबंदी

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी करने का ऐलान किया था और 7 नवंबर को रात 8:00 बजे टीवी पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को यह संदेश दिया कि आज रात 12 बजे के बाद 500 और 1000 के नोट मान्य नहीं होंगे और इन को बदलने के लिए आपको इन नोटों को बैंक में जमा करना होगा। इसके बाद बैंकों में इन नोटों को जमा करने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती हैं। लेकिन इन लाइनों में गरीब मजदूर ही लगे देखे उन्होंने इस लाइन में लाठियां भी खाई है और पैसा निकालने के लिए लोगों ने अपना पूरे दिन का काम भी खोया था जिस नोटबंदी का दिलासा देकर बड़े-बड़े वादे किए थे कि देश में काला धन आएगा। और इनके साथ पतंजलि के मालिक बाबा रामदेव ने भी यही कहा था कि नोटबंदी से काला धन आएगा नोटबंदी भी हुई और आज 3 साल बीत गए लेकिन कालाधन आज भी लापता है।

मोदी सरकार ने नोट बंदी का फैसला तो ले लिया लेकिन इसको लेकर तैयारी कुछ भी नहीं थी बैंकों में पैसा नहीं था और लोग पैसा निकालने के इधर-उधर भटक रहे थे। । पैसा निकालने के लिए बैंकों में पर्याप्त पैसा नहीं था कई लोगों की इस नोटबंदी में लाइन में लगने से जान भी गई हैं। जब नोट बंदी का फैसला लिया गया था तब सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी बातें की जा रही थी कि अब देश में नोटबंदी हो गई है और काला धन आएगा लेकिन आज 3 साल बीत गए हैं नोटबंदी का फायदा आज भी लापता है।

बिना तैयारी के लॉक डाउन

जिस तरीके से मोदी सरकार ने नोट बंदी का बिना तैयारी के फैसला लिया था उसी तरीके से मोदी सरकार ने कोरोनावायरस के चलते हुए लॉक डाउन का फैसला ले लिया । जब पूरे देश में लॉक डाउन किया गया तब सिर्फ 4 घंटे दिए गए थे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह फैसला 25 मार्च को लिया। लेकिन इससे पहले जनता कर्फ्यू लगाया था लेकिन इस जनता कर्फ्यू में भी मोदी सरकार के पास कोई तैयारी नहीं थी। आज पूरे देश में लॉक डाउन को 1 महीने से ज्यादा हो चुका है पहले यह लॉक डाउन 21 दिन का था उसके बाद बढ़ाकर 3 मई कर दिया गया। इस बीते 1 महीने में क्या सरकार ने ज्यादा से ज्यादा जांच की। क्या डॉक्टरों के पास जरूरी सामान पहुंचा। क्या जो मजदूर बाहर फंसे हुए थे उनकी जांच करके उन्हें घर भेजा गया । बल्कि सच तो यह है कि जो मजदूर बाहर फंसे हुए थे वह आज भी वहीं फंसे हुए हैं।

जिस राज्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बने वो राज्य आज भारत मे कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों में दूसरे नंबर पर है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में चुनाव प्रचार किया तो इस गुजरात का अपने चुनावों में भरपूर जिक्र किया इन्होंने उसे गुजरात मॉडल का नाम दिया था आज वही गुजरात मॉडल भारत में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों में दूसरे नंबर पर है। और गुजरात के सूरत में उड़ीसा के मजदूरों बाहर सड़कों पर उतर आए थे इन्होंने धरना प्रदर्शन इसलिए किया क्योंकि यह लोग अपने घर जाना चाहते थे इनके पास खाने-पीने की सुविधा नहीं थी। लॉक डाउन 2.0 3 मई को खत्म होने वाला है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो 3 तारीख के बाद भी लॉक डाउन बढ़ाने का विचार कर सकती है सरकार।