बाहर से काम करके आए थे मजदूर गांव वालों ने कहा पहले जांच कराओ बरना घुसने नहीं देंगे

बरेली के खेलम गांव के करीब 40 परिवार हिमाचल प्रदेश में फैक्ट्री में काम करते थे जब लॉक डाउन हुआ तो वह फस गए कुछ दिन तो उन्होंने काट लिए लेकिन फिर महामारी का सामना करना पड़ रहा था फैक्ट्री बंद हो गई थी काम करते तो क्या करते । ऊपर से सुपरवाइजर ने भी पैसा देने से इंकार कर दिया मकान मालिक से परेशानी उसे भी किराए की जरूरत थी वह भी नोटिस देने लगा की महीने की 1 तारीख से पहले किराया देकर जाना उन लोगों के पास इतना स्टॉक नहीं था कि वह इस लॉक डाउन के 21 दिन कमरे में रहकर अपने परिवार के साथ काट लें। टीवी भी खोल कर देखते तो सिर्फ हिंदू मुस्लिम की बहस ही नजर आती परंतु इन गरीबों की आवाज कोई नहीं उठा रहा था यह मजदूर दूसरे प्रदेश में काम करने गए थे और वहां फंस गए आने के लिए कोई सवारी का इंतजाम नहीं था ट्रेन भी बंद है और बसे भी। गांव में अधिकतर लोग दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं क्योंकि गांव में इतने व्यवसाय होते नहीं और इस गांव के अधिकतर लोग दूसरे राज्य यानी हिमाचल प्रदेश में काम करने गए थे कई दिन तक इन लोगों ने इंतजार किया कि कोई सवारी का इंतजाम हो जाए तो हम लोग अपने घर चले जाएं लेकिन काफी दिनों के इंतजार करने के बाद उनके कोई हल नहीं निकल रहा था अंत में विवेक होकर इन्होंने पैदल यात्रा करने का मन बना लिया और बोरिया बिस्तर बांध कर घर की ओर निकल पड़े 5 दिन चलने के बाद यह घर पहुंचे घर पहुंचने के बाद इन्होंने अपनी आपबीती सुनाई उन्होंने बताया रात में हम सब इकट्ठे होकर आराम करते थे सामान को लादकर पैदल चलना कितना कठिन था बच्चों को भी साथ लाए इनको इतना पैदल नहीं चल पाना मुश्किल था तो इन्हें गोद में लेकर भी पैदल चले रास्ते में कुछ लोग मिले जिन्होंने हमारी मदद की खाना खिलाया और कुछ आर्थिक मदद भी की जिससे हम कठिनाई को पार करते हुए आसानी से अपने घर आ गए घर आते ही चैन की सांस ली लेकिन जैसे ही उन्होंने गांव में घुसने की कोशिश की वैसे ही इन्हें गांव वालों ने रोक लिया और इनके सामने सवाल किया कि आप लोग दूसरे प्रदेश से बाहर से यात्रा करके आए हैं इसलिए हम आपको गांव में नहीं घुसने देंगे पहले आप किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जांच करा कर आइए फिर हम घुसने देंगे इसी बीच मजदूरों और गांव वालों के बीच झड़प भी हुई लेकिन गांव वाले जांच कराने के सवाल पर अड़े रहे फिर उन्होंने उन्हें समझाया कि अगर आप लोगों में से किसी को कोरोनावायरस संक्रमण पॉजिटिव आया तो यह संगठन पूरे गांव में फैल सकता है सबसे पहले आपके परिवार को पहले गा फिर उसके बाद आपके पड़ोसी को और फिर आप जिस जिस से मिलोगे उस उसको यह संक्रमण फैलता जाएगा और वह सकता है पूरे गांव में फैल जाए फिर इस गांव के जितने भी आसपास गांवों में फैल जाए उनमें से किसी एक मनुष्य को समझ में बात आ गई और उसने फैसला लिया कि हम गांव में तभी करेंगे कि जब हम अपनी और अपने हिसाब जितने भी लोग आए हैं इनकी जांच करा कर आएंगे अगर हम में से कोई भी कोरोना पॉजिटिव निकलता है तो खुद को परिवार से अलग करेंगे फिर उन लोगों ने सामान नहीं रखा और वहीं से सीधे मझगवां स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और अपनी कोरोनावायरस की जांच कराई सभी लोग जांच कराने के बाद घर लौटे। इन लोगों ने बताया कि गांव में कुछ लोग दिल्ली काम करते थे और दिल्ली से काम करके अपने घरों में आकर छिप कर बैठ गए हैं इन्होंने अपनी कोई भी जांच नहीं कराई है और यह अपने आप को ही नहीं अपने परिवार को और पूरे गांव को संक्रमण में डाल सकते हैं उन्होंने बताया कि इस गांव की कई लोग कोरोना की जांच कराने के लिए डर रहे हैं उनके दिल में डर बैठा हुआ है कि कहीं अगर हमको ना पॉजिटिव निकल आए तो पता नहीं कहां ले जाएं। जब लोग अपनी जांच करा कर आए तो पूरे गांव ने उनकी तारीफ की और कहा कि ऐसा हर किसी के गांव में बाहर से आने वाले व्यक्तियों को करना चाहिए इसमें अपनी और अपने परिवार की और पूरे गांव की सुरक्षा है क्योंकि अगर यह संक्रमण गांव में फैल गया तो इसका रोक पाना बहुत मुश्किल हो सकता है क्योंकि गांव में इतनी सतर्कता नहीं होती है और गांव में लोग ज्यादा साफ-सफाई का ख्याल भी नहीं रख पाते हैं शहरों में तो लॉक डाउन का पालन करते लोग नजर आ रहे हैं लेकिन गांव में तो लोग दिख रहे हैं ।