बस या ट्रेन से नहीं , तो ट्रक से ही पहुंचा दो इन गरीब मजदूरों को

अब भारत में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं 24 घंटे में 4000 मामले आए हैं। ऐसे में लॉक डाउन खोलना तो मुश्किल है लेकिन इन गरीब मजदूरों ने लॉक डाउन के कुछ दिन तो काट लिए और लोग डाउन खुलने की तारीख का इंतजार करने लगे कोरोनावायरस काबू ना होने पर लॉक डाउन का समय बढ़ाया गया। लॉक डाउन बढ़ते ही इन मजदूरों की समस्याएं भी बढ़ने लगी। जितना धन कमाया था लॉक डाउन में बंद कमरे में बैठकर उस से पेट भर लिया अब पेट भरने के लिए कुछ नहीं है तो इन गरीब मजदूरों की घर की याद आ रही है।

लेकिन घर जाएं तो जाएं कैसे ट्रेन चल रही है तो उन पर नंबर नहीं आ पा रहा है क्योंकि ट्रेन के डिब्बों की सीटों से कई गुना ज्यादा मजदूरों की संख्या है और यह मजदूर एक प्रदेश में अलग-अलग स्थान के लोग हैं। कोई बिहार का है कोई दिल्ली का है कोई राजस्थान का है कोई पंजाब का है अलग-अलग शहरों के मजदूर घर जाने को तरस रहे हैं। ऐसे वक्त में सिर्फ मजदूरों के पैर ही सहारा है और पैदल चलने के अलावा कोई समाधान नहीं है मजदूर वर्ग के लोग कई लोगों का समूह बनाकर पैदल यात्रा कर रहे हैं इसमें से भी इस समूह के लोग एक जगह के नहीं होते हैं।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो 4 दिन पहले अपलोड किया गया है जिसमें मजदूरों का समूह अपने घर गोरखपुर वापस लौट रहा है। इस वीडियो में वीडियो रिकॉर्ड करने वाला पूछ रहा है कि आप कब से पैदल चल रहे हैं तो मजदूर कहते हैं कि हम 15 दिन से पैदल चल रहे हैं। यह समूह लगातार पैदल चल रहा है भूख प्यास से व्याकुल घर की आस लगाए हुए मजदूरों का ग्रुप आगे बढ़ रहा है। रास्ते में कुछ फरिश्ते मिल जाते हैं जो इन्हें पेट भरने के लिए कुछ न कुछ सामान दे देते हैं। देखिए यह ट्वीट इसमें मजदूरों का ग्रुप को एक व्यक्ति कैसे मदद पहुंचा रहा है और मजदूर अपनी परेशानी बयान कर रहे हैं।

अब यह दूसरे गरीब मजदूर की दर्दनाक घटना देखिए इन मजदूर का नाम रामदास है और यह अपने घर की ओर लगातार पैदल चल रहे हैं भूख प्यास लगती है जहां कोई खाना खिला देता है खाना खा लेते हैं रात में भी रामदास पैदल चल रहे थे। और रात में अब वाहन भी चलने लगे हैं सामने आता वाहन लाइट की रोशनी में रामदास को कुछ देख नहीं पाया जिससे वे टकरा गए। रामदास को घायल हुए 12 घंटे से ज्यादा हो चुके थे और इन्हें कोई दवाई नहीं मिल पाई थी। रामदास नाम के गरीब मजदूर को कल्याण से नागपुर पैदल ही जाना है और यह चोट उन्हें शाहपुर के आसपास लगी है जिससे वह घायल होकर जमीन पर बैठे हैं। देखिए एनडीटीवी के पत्रकार सोहित मिश्रा का यह ट्वीट

गरीब मजदूर पैदल चलकर रास्ते भी भटक रहे हैं क्योंकि इन सब को सैटेलाइट जीपीएस सिस्टम चलाना नहीं आता हाईवे पर पैदल इसलिए चल रहे हैं कोई बता देता है कि यह हाईवे वहां गया है बस यही उम्मीद में मजदूर चले जा रहे हैं जिन लोगों के पास मोबाइल है वह जीपीएस सिस्टम के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। सरकार इन मजदूरों को अगर रेलगाड़ी या बस के बजाय ट्रक में भी भर कर भेज देगी तो यह मजदूर खुशी-खुशी ट्रक में खड़े होकर अपने घर चले जाएंगे।