पीएम केयर फंड , गरीब जनता की कब केयर करेगा

पीएम केयर फंड में भारत के हर नागरिक ने जो पीएम केयर में पैसे देने में जिसकी क्षमता है उसने पीएम केयर में गरीब मजदूरों की मदद के लिए पैसा दिया। दरअसल यह पैसा बड़े-बड़े उद्योगपतियों और मिडिल क्लास के जो लोग हैं उन्होंने इस फंड में पैसा यह सोच कर दिया था कि हम जो पैसा पीएम केयर फंड में ले रहे हैं वह गरीबों की मदद के काम आएगा उन गरीबों की मदद के काम आएगा जो दिहाड़ी मजदूर हैं जिनका रोज का कमाना खाना है उनके लिए लोगों ने पैसे दान दिए थे।

और जो देश में स्वास्थ्य को लेकर समस्याएं खड़ी हो रही हैं उनका समाधान करने के लिए देश की जनता ने इसकी पीएम केयर में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। इस पीएम केयर फंड में बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने करोड़ों रुपए दिए हैं। जिन जिन लोगों ने पीएम केयर फंड में पैसे दिए हैं वह अब यह सोच रहे होंगे कि शायद हम यह पैसा डायरेक्ट अगर गरीबों की मदद करने में लगा देते तो अच्छा होता। पीएम केयर फंड पर विपक्ष भी सवाल खड़े कर रहा है। कि आखिर पीएम केयर का पैसा गरीबों के कब काम आएगा

जो गरीब मजदूर दूसरे राज्यों में लॉक डाउन के समय फंस गए थे सरकार अगर चाहती तो उन्हें इसी पीएम केयर के फंड से कुछ हिस्सा मदद करके उन्हें रेलगाड़िया बस से फ्री पहुंचाया जा सकता था कि प्रधानमंत्री को दूसरे लोग डाउन के बाद काफी समय भी मिला था और वह इस समय में चाहते तो इन गरीब मजदूरों को से दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं इनको फ्री बसे फ्री ट्रेन चला कर अपने घर भेज सकते थे लेकिन आपने ऐसा नहीं किया।

आज भी गरीब मजदूर सड़कों पर चल रहा है किसी तरकीब से घर पहुंच रहा है रास्ते में लोग मदद कर रहे हैं वह भी यही सोच रहे होंगे । जब लोग पीएम केयर फंड में दान दे रहे थे तब उस समय सलमान खान को लेकर खबरें आई थी सलमान खान ने अपने मजदूरों को अपने पास से मदद करने का ऐलान कर दिया 25000 मजदूरों की मदद के लिए सलमान खान आगे आ गए। सलमान खान आज भी गरीबों को राशन के पैकेट बना बना कर उनको मदद पहुंचा है।

मजदूरों को 21 दिन का लॉक डाउन काटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दो बार लॉक डाउन को बढ़ाया गया प्रधानमंत्री चाहते तो उनके पास तो काफी टाइम था वह आराम से इन गरीब मजदूरों को प्रधानमंत्री केयर फंड से इन्हें फ्री घर पहुंचा सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ बल्कि पूरे देश के मजदूर ही नहीं पैदल चलते रहें बल्कि प्रधानमंत्री के पैतृक प्रदेश जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन कर आए थे उस प्रदेश में गरीब इस लोक डाउन में सड़कों पर भूखे प्यासे चलते रहे

सड़कों पर ट्रेन नहीं चल रही थी गरीब मजदूर थक्कर सेन की पटरियों पर सो गए उन्हें क्या मालूम था कि एक ट्रेन आएगी और उनकी जिंदगी छीन कर ले जाएगी। वह तस्वीर आज भी बहुत दर्दनाक है जो पटरियों पर सूखी रोटी पड़ी है। अगर पीएम केयर का पैसा इन गरीब मजदूरों की मदद के लिए खर्च किया जाता तो आज यह गरीब मजदूर रेल की पटरी ऊपर ना सोते और ना ही पैदल सड़कों पर चलते।