तालाबंदी की वजह से नहीं आ सका बेटा , तो मुस्लिम पड़ोसियों ने मिलकर हिंदू शख्स का किया अंतिम संस्कार

यह मामला कर्नाटक के तुमकुरु का है। यहां सदियों से हिंदू और मुस्लिम लोग मिलकर एक साथ रहते हैं एक दूसरे की परेशानी में साथ देते हैं। और यही 60 साल के एक बुजुर्ग की मौत हो जाती है लेकिन उसका बेटा बाहर रहता था। लेकिन जब पिता की मृत्यु हुई तो लॉक डाउन की वजह से वह घर नहीं आ सका। और उसके परिवार वाले भी लॉक डाउन चलते हुए अंतिम संस्कार में नहीं आ सके।

फिर बस्ती के मुस्लिम लोगों ने इकट्ठे होकर इन 60 साल के बुजुर्ग के अंतिम संस्कार की तैयारी की। यह खबर गोदी मीडिया आपको नहीं दिखाएगा क्योंकि ऐसी खबरें दिखाने से भारत में नफरतें खत्म होती हैं और एकता बढ़ती है।

अखबार द हिंदू की खबर के अनुसार कॉलोनी में इन 60 साल के बुजुर्गों की मृत्यु हुई थी। इसी कॉलोनी में पिछले दिनों कोरोनावायरस संक्रमित मरीज निकल आया था जिसके कारण इस कॉलोनी को पूरा सील कर दिया गया था। जिसके कारण ना बाहर से कोई इस कॉलोनी में आ सकता और ना ही इस कॉलोनी से बाहर कोई जा सकता था इस वजह से इनका बेटा और उनका परिवार पिता के अंतिम संस्कार में नहीं आ सका था। पहले भी इसी तरीके की खबरें सामने आई थी जिसकी तस्वीर हम आपके साथ साझा कर रहे हैं।

बुजुर्ग का नाम नारायणराव था जो कि कपड़े सिलने का काम करते थे इनकी उम्र 60 साल की थी और इन्हें डायबिटीज की समस्या थी। जब इन बुजुर्गों को कोरोनावायरस चलते हुए कोई नहीं आ सका तब इसी मोहल्ले में से लड़कों का ग्रुप आ गया । और इन लड़कों ने मिलकर बुजुर्ग को शमशान भूमि पर ले गए और उन बुजुर्ग का अंतिम संस्कार भी किया।

अखबार द हिंदू की खबर के मुताबिक उन्हीं लड़कों के ग्रुप में से एक लड़का मोहम्मद खालिद बताता है कि जिस बुजुर्ग की मृत्यु हुई थी उसका बेटा उसका दोस्त है । घर में कोई नहीं था सिर्फ दो महिलाएं थी और भतीजे थे कोरोनावायरस संक्रमण मरीज मिलने से इस कॉलोनी को सील कर दिया गया था इससे बाहर का व्यक्ति कोई आ नहीं सका फिर मोहम्मद खालिद ने अन्य लड़कों के साथ मिलकर इन बुजुर्गों का अंतिम संस्कार किया और इस परिवार को मदद के लिए 5000 रुपये भी दिए।

ऐसे कई किस्से पहले भी अखबारों में और न्यूज़ पोर्टल वेबसाइट में आ चुके हैं सोशल मीडिया पर तो ऐसी खबरें आ ही जाती हैं । लेकिन गोदी मीडिया के चैनलों में ऐसी खबरें नहीं आ सकीं।