घास खाने को मजबूर हुआ BSNL का गार्ड 2 महीने से नहीं मिल रहा था वेतन

जब देश में कोरोनावायरस का संक्रमण नहीं था तब उससे पहले ही बीएसएनल चौपट हो गई थी जिओ के आने के बाद बीएसएनल पूरी तरीके से ठप हो गया इसमें बहुत से कर्मचारियों को निकाला भी गया लेकिन यह घटना तब की है जब कोरोनावायरस का नाम तक दुनिया में नहीं था लेकिन अब कोरोनावायरस का कहर पूरी दुनिया में फैल गया है भारत में संक्रमण का यह आंकड़ा बीस हजार को पार कर गया है लेकिन यहीं एक चौकाने वाली खबर आ रही है कि बीएसएनएल का एक सिक्योरिटी गार्ड घास खाने को मजबूर हो गया पिछले 2 महीने से उसे वेतन नहीं दिया गया और जो उसके पास जमा राशि थी वह खर्च हो चुकी थी अब उसके पास खाने को कुछ नहीं बचा था लेकिन भूख ने उसे घास खाने पर मजबूर कर दिया

इसी सिक्योरिटी गार्ड का नाम संजीव बताया जा रहा है और यह बीएसएनएल की निजी वाहन को चलाने का काम करता था वहीं से उसके परिवार का गुजारा होता था लेकिन जब भारत में लॉक डाउन हुआ । उसके बाद बीएसएनएल की गाड़ी चलना बंद हो गई जिसके बाद इसका वेतन मिलना भी बंद हो गया जब वेतन मिलना बंद हो गया तब इसे दिक्कत होने लगी फिर इसमें बीएसएनल के सुपरवाइजर के द्वारा एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी बीएसएनल में ही शुरू कर दी। बीएसएनएल कार्यालय में रात को ड्यूटी करता था। लेकिन मंगलवार को यह पूरा दिन भूखा ही रहा तो किसके पास खाने को पैसे नहीं थे जब वह ड्यूटी का टाइम हुआ अब यह मौका ही बीएसएनएल कार्यालय में चला गया

भूख से तड़पता पूरे दिन का भूखा गार्ड को जब भूख ने परेशान किया जब उस पर रहा नहीं गया तब वो बीएसएनल ऑफिस के पास हरी हरी घास उखाड़ लाया और एक बोतल में पानी लेकर उसे खाने लगा किसी तरीके से घास खाकर पानी पी कर उस गार्ड ने अपनी भूख शांत की और अपनी ड्यूटी करने लगा लेकिन इस गार्ड का यही आरोप है कि इसका वेतन दो माह से क्यों नहीं मिल रहा है आखिर यह गरीब अपना घर बार बिना वेतन के कैसे चलाएगा।

आपको बता दें यह गार्ड सुपरवाइजर की ओर से कार्यरत था लेकिन वही सुपरवाइजर ने इस गार्ड पर भी एक आरोप लगाया है कि इसने शराब पीकर यह ड्रामा रचा है । यह बात बीएसएनल के उच्च अधिकारियों को मालूम हुई तब उन्होंने सुपरवाइजर के लिए नोटिस भेज दिया। जिसमे गार्ड की परेशानी से संबंधित जवाब मांगा है । लेकिन वहीं गार्ड की समस्या का समाधान करने की बजाय उसके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए हैं।