गोदी मीडिया ने कोरोनावायरस को लेकर ,डॉक्टरों की समस्याओं पर एक भी डिबेट नहीं की , गुजरात की दीवार की तरह दबाई जा रही गरीब मजदूरों की आवाज़

गोदी मीडिया के पत्रकारों ने अभी तक कोरोनावायरस को लेकर जो डॉक्टरों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था उन पर इस गोदी मीडिया ने अभी तक कोई भी डिबेट नहीं की है। डॉक्टर लोगों के पास मास्क नहीं थे उनके पास गिलप्स नहीं थे। लेकिन इन गोदी मीडिया के चैनलों ने इन डॉक्टर लोगों की समस्याओं पर अभी तक कोई डिबेट नहीं की। जबसे कोरोनावायरस के मामले भारत में बड़े हैं और जब से भारत में लॉक डाउन को लागू किया गया है । तब से अब तक डॉक्टर लोगों की समस्याओं पर कोई डिबेट नहीं की गई।

आपको मालूम है टीवी पर डिबेट क्यों की जाती है ताकि जनता की जो मुद्दे हैं जो परेशानियां हैं वह सरकार के सामने लाने के लिए डिबेट्स की जाती है लेकिन यहां इन डिबेट्स को ऐसा नाम दिया जाता है कि जिसमें मोदी जी का जय जय कार हो। पिछली डिबेटस में इन्होंने डॉक्टर्स लोगों की जो परेशानियां है उस पर सरकार से सवाल तक नहीं किया बल्कि इन्होंने सरकार से सवाल पूछने के बजाय सरकार के सामने परेशानी रखने के बजाय उन्होंने विपक्ष से सवाल पूछे हैं।

गोदी मीडिया के चैनल पर एक शो आता है पूछता है भारत का नाम तो आप जानते ही होंगे । शो का नाम तो ऐसा है कि वाकई इसमें गरीब लोगों के मुद्दे उठाए जाते होंगे भारत में जिन लोगों को परेशानी के दौर से गुजरना पड़ रहा है उनके सवाल सरकार से पूछे जाते हैं लेकिन अगर आप ध्यान से देखें तो इन के शो में अधिकतर विपक्ष को टारगेट किया जाता है और साथ में मोदी जी की जय जयकार की जाती है। आपके सामने सिर्फ रिपब्लिक भारत चैनल की डिवेट्स का आंकड़ा है । बाकी आंकड़ा अगली पोस्ट में बताएंगे

इस कार्यक्रम में अभी तक की डिबेट्स में से 18 डिबेट्स तबलीगी जमात को लेकर की गई। और इस डिबेट्स में जमकर हिंदू-मुस्लिम किया गया और इस हिंदू मुस्लिम करने से डिबेट को फायदा किसको होता है यह आप जानते ही हैं। गौर करिए शाहीन बाग मैं जो धरना प्रदर्शन हो रहा था वह बिल्कुल खत्म हो गया है लेकिन उस पर भी इस गोदी मीडिया ने 4 डिबेट की। और इसी कार्यक्रम पूछता है भारत में मोदी जी की जय जयकार पर 5 डिबेट की गई लेकिन डॉक्टर के सामने जो परेशानियां गुजर रही थी उन पर इसने कोई डिबेट नहीं की क्योंकि वह देश का मुद्दा ही नहीं था।

पालघर में जो मॉब लिंचिंग हुई थी तब पालघर मुद्दे पर 8 डिबेट की गई यह एक मुख्यधारा की मीडिया चैनल की जानकारी है। बांद्रा में जो प्रवासी मजदूर थे उन पर दो डिबेट्स की गई। लेकिन गुजरात के सूरत में दो-दो बार मजदूरों ने रोड पर आकर धरना प्रदर्शन दिया इस पर इस चैनल ने कोई डिबेट नहीं की। अभी पिछले सप्ताह की बात है जब गुजरात के सूरत में लोग सड़कों पर निकल आए थे और घर जाने के लिए धरना प्रदर्शन देने लगे उनकी बात ना सुनी जाने पर उन्होंने वहां तोड़फोड़ की आगजनी की यहां तक के पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े लेकिन गोदी मीडिया ने अभी तक गुजरात के सूरत के मजदूरों पर कोई डिबेट नही की।

कोरोनावायरस के संकट में जिन मुद्दों पर चर्चाएं होनी थी उन पर एक भी चर्चा नहीं की अस्पतालों की हालत मेडिकल स्टाफ जो समस्याएं झेल रहा था उन पर कभी चर्चाएं नहीं हुई। मजदूर पैदल चलकर भूख से तड़पकर रोड पर मर गए उन पर कोई चर्चा नहीं हुई। कोरोनावायरस संक्रमित की जांच के लिए जो किट मंगाई थी उसमें कमी आने लगी थी। और डॉक्टरों को कठिन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन फिर भी इन पर कोई डिबेट नहीं की गई

आपको मालूम है यह गोदी मीडिया गरीबों की आवाज दबा रहा है यानी मजदूर सड़क पर पैदल चल चल कर भूख प्यास से तड़प रहे हैं और उनको ना दिखाने का मतलब यह है कि जब शहर में अमीर लोग बैठकर टीवी खोलते होंगे तो तब टीवी में इनकी डिबेट में मोदी जी की जय जयकार होती है और उन्हें लगता है कि वाकई देश में सब कुछ ठीक है लेकिन हकीकत यह है दोस्तों की इन गरीबों की आवाज को उसी तरीके से दबाया जा रहा है जिस तरीके से गुजरात में नमस्ते ट्रंप हुआ था तब गरीबों को छुपाने के लिए दीवारें खड़ी कर दी गई थी।