लोग तोड़ रहे है लॉक डाउन के नियम लेकिन गोदी मीडिया किसी और रास्ते पर.

मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने अपने बेटे की शादी लॉक डाउन में बड़े धूमधाम से की शादी बड़े धूमधाम से संपन्न हुई लेकिन इस शादी में लॉक डाउन के नियमों को ताक पर रखा गया और उसकी धज्जियां उड़ाई गई शादी में ना तो सोशल डिस्टेंस दिखा ना ही कोरोनावायरस से बचने के लिए एतिहाद बरतते हुए दिखाई दिए। अभी कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कई शादियां हुई जिसमें दूल्हा और दुल्हन मास्क लगाए हुए नजर आए और 4-5 बराती के साथ एक पंडित फेरे लेते हुए नजर आए। इन शादी के जोड़ों की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हुई इन्होंने लॉक डाउन में शादी तो थी लेकिन उसके नियम का पालन नहीं किया। मुख्यमंत्री के बेटे की शादी का छोटा सा वीडियो क्लिप एएनआई ने ट्वीट किया जब हम आपके साथ साझा कर रहे हैं

लेकिन बात यहां नहीं रुकती इसके बाद तमिलनाडु में एक सांड मर जाने के बाद उसकी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए लेकिन इस घटना पर ना तो कोई डिबेट हुई। सांड की अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए जिसमें सोशल डिस्टेंस के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही देखी जा सकती हैं ना तो कोई व्यक्ति मास्क लगाए हुए हैं और ना ही कोई व्यक्ति दूरी पर रहना चाह रहा है सभी लोग मिलकर शमशान भूमि की ओर जा रहे हैं लेकिन इन तस्वीरों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बिल्कुल नहीं हो रहा है इस मामले पर गोदी मीडिया बिल्कुल खामोश है हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर जमकर डिबेट करती है टाइम टाइम खबरें बनाती है लेकिन इस मुद्दे पर बिल्कुल खामोश हो गई है हमारी देश की भारतीय मीडिया।

सोशल मीडिया पर इस शादी को लेकर कई तरीके के वीडियो और फोटो वायरल हो रहे हैं सोशल मीडिया पर वायरल हुए फोटो में फोटो पर एक हिस्से में मुख्यमंत्री के बेटे की शादी का फोटो और दूसरी तरफ मजदूरों को मुर्गा बनाकर मार रही पुलिस का फोटो लगा हुआ है फोटो को लेकर टिप्पणियां भी की गई हैं कि अमीरों के लिए परमिशन और वह हर तरीके से आजाद हैं और वो अपनी शादियां लॉक डाउन में बड़े धूमधाम से कर रहे हैं लेकिन यह मजदूर अपने घर जाने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं यह मजदूरों को जब रास्ते में कहीं पुलिस मिलती हैं तब इनकी पिटाई लगाती है

31 मार्च को यानी लोग डाउन के 5 दिन बाद तबलीगी जमात का दिल्ली में मामला सामने आया था जैसे यह खबर मीडिया में आई समझ लो मीडिया ने भी काम शुरू कर दिया जो पिछले लगातार 6 सालों से  करते आ रहे हैं क्योंकि इन्होंने तबलीगी जमात के बहाने किसी एक धर्म विशेष को टारगेट करना शुरू कर दिया  जब इस खबर से जी भर गया तब तबलीगी जमात का लिंक सीधा पाकिस्तान के आतंकवादियों से किया। एक पत्रकार है कभी किसी ने डिबेट की चर्चा में डियर फ्रेंड बोला है हम उन्हें पत्रकार की बात कर रहे हैं जिन्होंने जमात का मामला आने के बाद किसी एक धर्म विशेष को निशाना बनाया और इनके भड़काऊ बयानों से सांप्रदायिकता तनाव बढ़ गया यह जनता को फिर उसी पटरी पर ले आए जो कि कोरोनावायरस आने से भारत में एकता की लहर आई थी इन्होंने सिर्फ तबलीगी जमात को टारगेट करके समाज को दो फाड़ कर दिया ।लेकिन ये आजतक ये जमात को नहीं भूले है

यही तो खासियत है इनकी। लोक नाम के नियमों को तोड़ने की ऐसी ऐसी खबरें आ रही हैं लेकिन उस पर कोई डिबेट नहीं हो रही है जब मजदूर पैदल चल रहे थे अपने घरों को जाने के लिए बिल्कुल मजबूर हो गए थे और यातायात साधन बंद होने के बाद अपने परिवार के साथ पैदल ही निकल पड़े लेकिन इस व्यक्ति ने इन मजदूरों पर कोई चर्चा नहीं की बल्कि जिस समय मजदूर पैदल अपने गांव को लौट रहे थे उस समय इनके प्राइम टाइम शो मे अनुपम खेर और कुमार विश्वास की कविताएं चल रही थी ।