गुजरात के सूरत में मजदूरों की भीड़ पर गोदी मीडिया में खामोशी क्यों

25 मार्च को संपूर्ण देश में लॉक डाउन किया गया भारत में दूसरे राज्यों में से बहुत से मजदूर मुंबई जैसे बड़े शहरों में काम करने अपने परिवार के साथ जाते हैं यह मजदूर फैक्ट्रियों में काम करते थे लेकिन लोग डाउन की वजह से इनका कारोबार ही नहीं बल्कि खाने-पीने की भी दिक्कत हो रही है जो लोग बिहारी मजदूर थे गरीब थे वह पैदल ही निकल गए लेकिन जिनके पास थोड़ा बहुत धन था जिसके साथ परिवार था उसने सोच रखा था कि यह 21 दिन का लॉक डाउन है और 21 दिन बाद जब लॉक डाउन को लेगा तब यह अपने पूरे परिवार के साथ घर लौट जाएंगे लेकिन जब 14 तारीख आती है तो यह सब इसी सोच में रहते हैं कि शायद ट्रेनें चलेंगी और हम अपने परिवार के साथ घर लौट जाएंगे । लेकिन इसी बीच एबीपी माझा नाम का चैनल 11:29 am पर यह खबर चलाता है की जनसाधारण एक्सप्रेस चलने जा रही है और इसमें लोग अपने घर जा सकेंगे

लेकिन अगर सोचा जाए तो 10:00 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह राष्ट्र को संदेश दिया था कि पूरे देश में 3 मई तक लॉक डाउन बढ़ा दिया गया है जरा सोचिए इस चैनल ने यह खबर कैसे चला दी । लेकिन इस मामले में एबीपी माझा चैनल के रिपोर्टर राहुल कुलकर्णी को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है वह उनसे पूछताछ कर रही है। जैसे ही यह खबर चलती है मजदूर अपना बोरिया बिस्तर बांध कर स्टेशन की ओर निकल पड़ते हैं हजारों की संख्या में लोग स्टेशन पर पहुंच जाते हैं और फिर स्टेशन पर बवाल होने लगता है। लेकिन जब यह खबर गोदी मीडिया को मालूम पड़ती है तो वह इसे अपने प्रोपेगेंडा का हिस्सा बना लेते हैं उन्होंने इस मुद्दे को उठ से हिंदू मुस्लिम करने की कोशिश की क्योंकि जहां भीड़ जुटी हुई है वहां एक मस्जिद है कई गोदी मीडिया के पत्रकारों का कहना है कि यह भीड़ किसी की साजिश तो नहीं है या इसमें मुस्लिम नेताओं का हाथ तो नहीं है यानी गोदी मीडिया का चेहरा एक बार फिर साफ हो गया कि मुस्लिम को टारगेट करने का क्योंकि ऐसा करने से इनके न्यूज़ चैनल की टीआरपी बढ़ती है रेटिंग बढ़ती है

जो हाल मुंबई की रेलवे स्टेशन पर है वही हाल सूरत में मजदूरों का है मजदूर फिर सड़कों पर उतर आए हैं लेकिन गोदी मीडिया में इसका कोई जिक्र नहीं क्योंकि यही वह सूरत जिसका हिस्सा है यहीं से हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री चुने गए थे अक्सर जब भारत में चुनाव होते हैं तब इसी गुजरात मॉडल का प्रचार प्रसार सामने आता है इसी गुजराती भाषा में प्रचार प्रसार किया जाता है लेकिन जब सूरत में मजदूरों के हाल पर किसी गोदी मीडिया के पत्रकार ने चर्चा तक नहीं की वह मजदूर खाने को परेशान है भूखे हैं प्यासे हैं वह अपने घर जाना चाहते हैं। जिस गुजरात मॉडल का गोदी मीडिया अफसर अपने कार्यक्रमों में जिक्र करता है उसी गुजरात मॉडल से एक खबर सामने आई है कि मुस्लिम मरीजों को अलग रखा गया है और हिंदू मरीजों को अलग रखा गया है दोस्तों आपको बता दे। भारत के कई हिस्सों से यह खबर आई थी कि सब्जी विक्रेताओं से आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं आधार कार्ड नहीं होने पर उनकी पिटाई की जा रही है उनसे धर्म पूछा जा रहा है इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है क्या सब्जी का भी कोई धर्म होता है।

कई दिन पहले इन मजदूरों ने सड़क पर आगजनी की और यह मजदूर अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतर आए लेकिन खामोश सत्ता की चाटुकारिता करने वाली गोदी मीडिया इस मुद्दे पर बिल्कुल खामोश रही। सोचो कोरोनावायरस हमारे देश में पहले से ही इंट्री कर चुका है और इसके मरीजों की संख्या लगभग 10000 के पार हो गई है लेकिन इसी बीच अगर समाज में हिंदू मुस्लिम फैल गया तो आप सोच भी नहीं सकते कि हालात बद से बदतर हो जाएंगे

जब यह भीड़ लगी तो गोदी मीडिया इस भीड़ को अपनी पुरानी नजर से देखने लगा उस वीडियो में इन्हें एक मस्जिद दिखाई दे गई और फिर इन्होंने अपना प्रोपेगेंडा शुरू कर दिया इन्होंने अपनी वही हिंदू मुस्लिम वाली खबरें चलाना शुरु कर दी जो यह पिछले 6 सालों से करते आ रहे हैं रजत शर्मा इन का कार्यक्रम जो आपने देखा ही होगा आप की अदालत। विक्रम का नाम तो ऐसा है जैसे बड़े बड़े मुद्दों पर यह फैसला करते हो लेकिन अगर इनके ट्विटर टाइम लाइन पर नजर की जाए तो इन्होंने भी कुछ ऐसा ही ट्वीट किया जो हम आपके सामने पेश कर रहे हैं

जानते हैं गोदी मीडिया अभी तक जमात को नहीं भूल पाया है जिस्म जमात को लगभग 15 दिन होने जा रहे हैं 31 मार्च को तबलीगी जमात का मामला सामने आया था और फिर बाद में गोदी मीडिया ने तबलीगी जमात के सहारे पूरे मुस्लिम धर्म को टारगेट किया था इसमें झूठी खबरें और पुराने वीडियो प्रसारित किए गए थे और जिसका खंडन यूपी पुलिस यानी योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने किया था यहां तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार है । खैर छोड़िए इस गोदी मीडिया का यह नफरत ही काम पिछले 6 सालों से चल रहा है हमें तो सच लिखने का शौक है लिखते रहेंगे।